कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस अभियान के दौरान 13 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने डीसीपी श्रवण कुमार और एडीसीपी अंजली विश्वकर्मा की निगरानी में पूरी की। टीम ने पहले ड्रोन की मदद से पूरे इलाके की निगरानी की और फिर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को अश्लील वीडियो से जोड़ने की झूठी धमकी देते थे। इसके बाद वे खुद को पुलिस, साइबर सेल या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ितों पर दबाव बनाते थे। आरोपी गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर तुरंत बैंक खातों और यूपीआई के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करवाते थे।
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कानपुर छापेमारी में मोबाइल, कारें और कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य जब्त
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 29 मोबाइल फोन, तीन कारें और कई अहम डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। जांच के दौरान बरामद मोबाइल फोन से जुड़े 48 आईएमईआई नंबर और 68 सक्रिय मोबाइल नंबरों की पहचान हुई। पुलिस का कहना है कि इन नंबरों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में साइबर अपराध करने के लिए किया जाता था। सभी मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित कर लिया गया है। विशेषज्ञ अब इन उपकरणों से डेटा निकालकर गिरोह की गतिविधियों और संपर्कों की जांच कर रहे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों से गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके आर्थिक लेनदेन की जानकारी मिलेगी। बरामद सामग्री के आधार पर जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के विस्तार और संचालन की पूरी तस्वीर सामने लाने का प्रयास कर रही हैं।
जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को अपना शिकार बनाता था। आरोपी पहले फोन या ऑनलाइन माध्यम से संपर्क स्थापित करते थे और फिर पीड़ितों को अश्लील वीडियो या आपत्तिजनक ऑनलाइन गतिविधियों में फंसाने का झूठा आरोप लगाते थे। इसके बाद वे खुद को पुलिस अधिकारी, साइबर सेल कर्मचारी या जांच एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर कार्रवाई की धमकी देते थे। आरोपी गिरफ्तारी, मुकदमा और सामाजिक बदनामी का डर दिखाकर लोगों पर तत्काल पैसे भेजने का दबाव बनाते थे। अधिकांश मामलों में रकम बैंक खातों और यूपीआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से वसूली जाती थी। कई पीड़ित डर और घबराहट के कारण बिना सत्यापन किए आरोपियों के बताए खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते थे। पुलिस अब ऐसे सभी लेनदेन की जांच कर रही है।
राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर दर्ज 189 शिकायतों से जुड़े मिले आरोपी
पुलिस जांच के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 189 शिकायतों का संबंध इसी गिरोह से सामने आया। अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों में 60 शिकायतकर्ताओं के मोबाइल नंबर सीधे आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए नंबरों से जुड़े मिले हैं। इस तथ्य ने स्पष्ट कर दिया कि गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था। जांच एजेंसियां अब इन सभी शिकायतों का मिलान बरामद डिजिटल साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड से कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि गिरोह ने अलग-अलग राज्यों में कितने लोगों को निशाना बनाया। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ शिकायतों और ठगी की रकम दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है। इस मामले में कई नए खुलासे होने की संभावना भी जताई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। गिरोह ने दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल समेत कई राज्यों के लोगों को अपना शिकार बनाया। आरोपियों के मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक खातों और सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है। जांच एजेंसियां विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर इस नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या धमकी मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
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