छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के बड़ेतेवाड़ा गांव में शव दफनाने को लेकर विवाद भड़का। दो समुदाय आमने-सामने आए और देखते ही देखते पूरी स्थिति हिंसक झड़प में बदल गई। गांव के लोग 70 वर्षीय चमरा राम सलाम की मृत्यु और अंतिम संस्कार पर संदेह जताने लगे। भीड़ ने शव को कब्र से निकालने की मांग करते हुए पारंपरिक रीति-रिवाजों को चुनौती दी। झड़प के दौरान पत्थरबाज़ी हुई और दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे पर हिंसक हुए। हिंसा में ASP आशीष बंछोर समेत 20 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए और अस्पताल पहुंचे। भीड़ ने प्रार्थना हॉल में तोड़फोड़ की,अंदर रखी वस्तुएँ आग में जला दी। पुलिस ने तनावपूर्ण माहौल को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाए और सुरक्षा बढ़ाई। स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने बताया कि संपत्ति को भी हिंसा में काफी नुकसान पहुंचा।
बड़ेतेवाड़ा गांव में शव दफनाने को लेकर हिंसा और झड़प
चमरा राम सलाम की मौत 16 दिसंबर को हुई थी और यह बीमारी के कारण हुई। उनके पुत्र राजमन सलाम ने अपनी निजी जमीन पर पिता का शव दफनाया। राजमन सलाम ने ईसाई धर्म अपना लिया था और अपने पिता के अंतिम संस्कार को ईसाई रीति से किया। कुछ ग्रामीणों ने दफन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और शव को बाहर निकालने की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार स्थानीय पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार नहीं किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विवाद ने पूरे गांव में तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी थी। दो समूहों के बीच टकराव और पत्थरबाज़ी की घटनाओं ने स्थिति और बिगाड़ दी। पुलिस ने बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई और अतिरिक्त बल तैनात किया।
पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर झड़प को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बढ़ाई। ASP आशीष बंछोर समेत घायल पुलिसकर्मियों को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने गांव में शांति स्थापित करने के लिए टकराव वाले क्षेत्रों की निगरानी शुरू की। अधिकारियों ने दोनों समुदायों के नेताओं को समझाया और शांति स्थापित करने का प्रयास किया। पुलिस बल ने हिंसा फैलाने वाले बाहरी तत्वों के प्रवेश पर रोक लगाई और सतर्कता बढ़ाई। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान कर की कार्रवाई होगी। पुलिस ने बताया कि झड़प में घायल नागरिकों और पुलिसकर्मियों का इलाज प्राथमिक अस्पतालों में हुआ। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए गए ताकि किसी भी नए संघर्ष को रोका जा सके।
Also Read : दिल्ली ब्लास्ट मामला: साबरमती जेल में हिंसा डॉ. अहमद सईद सहित कई घायल
प्रशासन की प्रतिक्रिया, मोबाइल बंद और भविष्य की कार्रवाई
हिंसा के बाद कांकेर के आमाबेड़ा क्षेत्र में शनिवार तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई। मोबाइल नेटवर्क भी बंद कर दिया गया ताकि अफवाहें फैलाने और स्थिति बिगाड़ने से रोका जा सके। क्षेत्र में बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई, जिससे लोग एक-दूसरे से संपर्क नहीं कर पाए। स्थानीय प्रशासन ने कहा कि यह कदम सुरक्षा बनाए रखने और हिंसा को रोकने के लिए आवश्यक था। पुलिस ने इंटरनेट और मोबाइल बंद करने के बाद भी लोगों को जरूरी सूचनाएं देने की व्यवस्था की। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आने के बाद ही सेवाएं पुनः शुरू की जाएंगी। आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी नया विवाद रोका जा सके।
आईजी बस्तर पी सुंदरराज ने सभी घटनाओं की जानकारी देते हुए स्थिति की गंभीरता बताई। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने तुरंत कदम उठाकर झड़प रोकने और सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया। सुरक्षा बल तैनात किए गए ताकि दोनों समुदायों के बीच किसी भी नए संघर्ष को रोका जा सके। अधिकारियों ने कहा कि मृतक के अंतिम संस्कार पर विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाएगा। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षा और प्राथमिक सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। आग और तोड़फोड़ के कारण क्षतिग्रस्त संपत्ति की मरम्मत के लिए योजना बनाई जा रही है। प्रशासन ने भविष्य में ऐसे विवादों को रोकने के लिए ग्रामीणों के साथ संवाद बढ़ाने का निर्णय लिया। स्थानीय लोग अब शांति और सामान्य जीवन बहाल होने की उम्मीद के साथ स्थिति पर नजर रख रहे।


More Stories
Rajya Sabha setback: Buzz over Raghav Chadha’s BJP move
Supreme Court lauds peaceful Bengal Phase 1 voting turnout
एयरस्पेस बैन: भारत ने पाकिस्तानी उड़ानों पर प्रतिबंध 24 मई तक बढ़ाया