कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार को कहा कि राज्य को ‘नक्सल मुक्त’ बनाने के उद्देश्य से सक्रिय माओवादियों को आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित करने के प्रयास जारी हैं। उनका यह बयान उस खबर के बीच आया, जिसमें कहा गया था कि कुछ संदिग्ध माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा व्यक्त की है।
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने मंगलवार को बृहत कर्नाटक बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के कुछ इंजीनियरों के कार्यालयों पर छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, करीब सात ईडी अधिकारी सुबह 11 बजे बीबीएमपी मुख्यालय पहुंचे और बोरवेल ड्रिलिंग व स्टॉर्मवॉटर ड्रेन से संबंधित फाइलों की जांच की। एक बीबीएमपी अधिकारी ने बताया, “बीबीएमपी के एक वरिष्ठ इंजीनियर पर ध्यान केंद्रित किया गया था, जो सार्वजनिक कार्यों से जुड़ी फाइलें जमा कर रहे थे।
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बीमा राशि के लिए बेटे ने की पिता की हत्या चार आरोपी गिरफ्तार
कर्नाटक के कलबुर्गी से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक व्यक्ति ने बीमा राशि के लिए अपने पिता की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोप लगाया कि बेटे ने अपने पिता की हत्या की और दुर्घटना का बहाना बनाया, ताकि वह बीमा राशि का दावा कर सके। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, और यह घटना जुलाई 2024 में घटी थी।
कलबुर्गी जिले के पुलिस अधीक्षक अडुरु श्रीनिवासुलु ने सोमवार को पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि कलिंगराय अपने बेटे सतीश को पीछे बैठाकर यात्रा कर रहे थे। जब वे बेन्नूर क्रॉसिंग के पास पहुंचे, तो बेटे सतीश ने पिता से रुकने को कहा ताकि वह पेशाब कर सकें। जैसे ही कलिंगराय रुके, सतीश के साथी अरुण ने ट्रैक्टर चला कर उन्हें कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद सतीश ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बीमा राशि का दावा किया। पुलिस ने जांच के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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इंडिया गेट का नाम बदलकर भारत माता द्वार रखने की मांग
भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इंडिया गेट का नाम बदलकर भारत माता द्वार करने का आग्रह किया। सिद्दीकी ने पत्र में दावा किया कि मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने मुगल आक्रमणकारियों व ब्रिटिश लुटेरों द्वारा दिए घावों को भरे हैं, उन्होंने गुलामी के दाग मिटा देश को खुशहाल बनाया है। इंडिया गेट का नाम बदलकर भारत माता द्वार रखना हजारों देशभक्तों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया और जिनके नाम इसकी संरचना पर अंकित हैं।


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