बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ कथित छेड़खानी और मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतनराम मांझी ने इस मामले को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। मांझी ने आरोप लगाया कि घटना में शामिल बताए जा रहे आरोपी यादव समुदाय से हैं। उन्होंने तेजस्वी यादव के उस राजनीतिक संदर्भ का उल्लेख किया, जिसमें वह बिहार और उत्तर प्रदेश के यादवों को अपना भाई बताते रहे हैं। मांझी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ऐसे ही कुछ लोगों ने जमुई में लड़की के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया और उसका वीडियो बनाया। उनके मुताबिक, ऐसा करके सरकार की छवि खराब करने की कोशिश की गई। हालांकि, आरोपियों की जाति को लेकर मांझी के बयान को पुलिस जांच के तथ्य के तौर पर नहीं बताया गया है।
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मांझी ने सरकार की कार्रवाई का किया उल्लेख
जीतनराम मांझी ने अपने बयान में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई कर रहा है और किसी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा। मांझी ने तेजस्वी यादव से कथित तौर पर अपने समर्थकों और समुदाय के लोगों को सावधान करने की बात भी कही। उनका बयान जमुई की घटना के बाद सामने आया, जब मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो चुकी थी। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर बिहार सरकार पर कानून-व्यवस्था के सवाल उठाए हैं। उन्होंने लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल किया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ गया है।
जमुई की घटना में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को पुलिस मुठभेड़ के दौरान मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्टों के अनुसार, हरेराम यादव भी इस कार्रवाई में घायल हुआ और उसे भी हिरासत में लिया गया। इससे पहले पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने वायरल वीडियो और उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की थी। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन भी किया गया है। पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है। अधिकारियों ने मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने की बात कही है।
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19 सितंबर को सामने आई थी घटना
पुलिस के अनुसार, जमुई में यह घटना 19 सितंबर की शाम हुई थी। एक नाबालिग छात्र और छात्रा उस इलाके में गए थे, जहां कथित तौर पर कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। दोनों के साथ मारपीट और बदसलूकी की गई। घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया गया और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों किशोर किसी स्थानीय क्षेत्र में गए थे और वहां से लौटते समय उन्हें युवकों के एक समूह ने घेर लिया। पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश शुरू की। मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं करने को लेकर भी अधिकारियों ने सावधानी बरतने की अपील की है।
जमुई की घटना ने बिहार में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर राजनीतिक विवाद को बढ़ा दिया है। विपक्षी नेताओं ने सरकार से जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। तेजस्वी यादव ने घटना को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए। वहीं, सत्ता पक्ष के नेताओं ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। इसी बीच, मांझी के बयान ने मामले में जातीय राजनीति को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है। उनके अनुसार, आरोपियों की पहचान यादव समुदाय से जुड़ी है और उन्होंने इसी आधार पर तेजस्वी यादव पर राजनीतिक टिप्पणी की। हालांकि, किसी आरोपी की जाति और राजनीतिक दल से संबंध अपने आप में अपराध में संलिप्तता साबित नहीं करते। फिलहाल पुलिस की जांच घटना में शामिल लोगों की भूमिका तय करने पर केंद्रित है।


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