दुकानों से सामान चुराने के लिए अंग्रेज़ी में शॉपलिफ्टिंग, बूस्टिंग और स्वाइपिंग जैसे कई शब्द इस्तेमाल होते हैं। कई लोग अकेले चोरी करते हैं, जबकि कुछ संगठित गिरोह मिलकर वारदात को अंजाम देते हैं। इस तरह की चोरी से दुनिया भर के रिटेल कारोबारियों को हर साल अरबों डॉलर का नुकसान होता है। पिछले कुछ वर्षों में कई देशों में ऐसे मामलों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब शायद ही कोई देश इस समस्या से अछूता बचा हो।
2024 में जर्मनी में शॉपलिफ्टिंग के करीब चार लाख मामले दर्ज हुए। इंग्लैंड और वेल्स में पुलिस ने पिछले साल पांच लाख से अधिक घटनाएं दर्ज कीं और इनमें सालाना लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। फ़िनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में सिर्फ पांच महीनों में चोरी के मामलों में 60 प्रतिशत उछाल आया। जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी रिटेल चोरी तेजी से बढ़ रही है। आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या अब वैश्विक रूप ले चुकी है।
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दुनिया भर में शॉपलिफ्टिंग के बढ़ते आंकड़े
विशेषज्ञों का मानना है कि चोरी के पीछे सिर्फ आर्थिक मजबूरी ही कारण नहीं है। जर्मनी की कोलोन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर निकोल बोगेलाइन कहती हैं कि कई लोग रोमांच या दोस्तों के सामने बहादुरी दिखाने के लिए भी चोरी करते हैं। कुछ युवाओं को लगता है कि बड़ी कंपनियों को इससे खास नुकसान नहीं होगा। वहीं, बढ़ती महंगाई भी लोगों को मुफ्त में सामान उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है, हालांकि इसके ठोस प्रमाण सीमित हैं। सेल्फ-चेकआउट काउंटरों की बढ़ती संख्या ने भी चोरी को आसान बनाया है।
संगठित गिरोहों ने शॉपलिफ्टिंग को एक धंधे का रूप दे दिया है। यूके पुलिस ने कई आपराधिक नेटवर्क की पहचान कर सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है। ये गिरोह योजनाबद्ध तरीके से महंगे सामान को निशाना बनाते हैं और सुरक्षा टैग हटाने के तरीके भी जानते हैं। कई बार वे बच्चों को भी साथ शामिल करते हैं ताकि संदेह कम हो। चोरी किया गया सामान अक्सर छोटी दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेच दिया जाता है।
अमेरिका में कई जगह शॉपलिफ्टिंग को गंभीर अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाता, जिससे अपराधियों का जोखिम कम हो जाता है। पुलिस अक्सर हिंसक अपराधों को प्राथमिकता देती है, इसलिए रिटेल चोरी के मामलों में त्वरित कार्रवाई नहीं हो पाती। दूसरी ओर, रिटेल कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आरएफआईडी टैग और स्मार्ट सर्विलांस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। कई स्टोर अतिरिक्त स्टाफ और बॉडी कैमरों की मदद से निगरानी बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि चोरी पूरी तरह खत्म नहीं होगी, लेकिन सख्त कानून, बेहतर तकनीक और मानवीय निगरानी से इसे कम जरूर किया जा सकता है।
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