मुजफ्फरनगर के पूर्व बसपा विधायक शाहनवाज राणा और उनके परिजनों के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में कुल नौ स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान ED ने करीब 3.6 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की। अधिकारियों को बड़ी मात्रा में कैश सूटकेस और बैग में भरा हुआ मिला। छापेमारी पूरी होने के बाद एजेंसी ने सभी संबंधित परिसरों को बंद कर दिया।
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पूर्व बसपा विधायक शाहनवाज राणा के ठिकानों पर ED की बड़ी कार्रवाई
ED ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के एक बड़े नेटवर्क की जांच के तहत यह कार्रवाई की। जांच एजेंसी को आरोपों के अनुसार बिना वास्तविक सामान की आवाजाही के फर्जी इनवॉइस और बिल तैयार किए गए। इन दस्तावेजों के जरिए कथित तौर पर बोगस ITC बनाया गया और उसे आगे बढ़ाया गया। जांच में बड़े पैमाने पर संदिग्ध सर्कुलर लेनदेन और रकम की लेयरिंग के संकेत भी मिले। ED अब इस नेटवर्क से जुड़े लोगों और कंपनियों की भूमिका की जांच कर रही है।
जांच के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के जरिए नकदी निकालने के सबूत भी मिले हैं। एजेंसी का मानना है कि इन गतिविधियों से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज करने के बाद ED ने छापेमारी शुरू की। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी जब्त किए। ED अब इन सभी रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है।
फर्जी ITC नेटवर्क की जांच में करोड़ों रुपये नकद बरामद
ED के लखनऊ जोनल कार्यालय ने सोमवार को सबसे पहले राणा से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई शुरू की थी। एजेंसी ने मुजफ्फरनगर स्थित न्यू राणा हाउस और गाजियाबाद की एक फर्म पर भी छापेमारी की। जांच के दौरान तीन करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में अलग-अलग ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान जब्त रकम बढ़कर करीब 3.6 करोड़ रुपये हो गई। ED पूरे मामले में कथित फर्जी ITC नेटवर्क की जांच को आगे बढ़ा रही है।
शाहनवाज राणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक चर्चित चेहरा रहे हैं। उन्होंने बसपा के टिकट पर चुनाव जीता और विधायक बने, लेकिन बाद में राष्ट्रीय लोकदल से जुड़ गए। नवंबर 2025 में उन्होंने आजाद समाज पार्टी (काशीराम) की सदस्यता भी ली थी। राणा का नाम पहले भी विवादों में रहा है और उनके खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई हो चुकी है। ED की ताजा छापेमारी ने अब फर्जी बिलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
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