वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी बलों द्वारा कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि मादुरो के साथ उनकी पत्नी को भी अमेरिका लाया गया है, जहां दोनों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस बीच, अमेरिका ने इस कदम को नार्को टेररिज्म से जुड़े आरोपों के आधार पर सही ठहराया है। इसी घटनाक्रम के बाद, Don-roe डॉक्ट्रिन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसे 19वीं सदी की मुनरो डॉक्ट्रिन का आधुनिक रूप माना जा रहा है। दरअसल, कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप इसे 21वीं सदी के संदर्भ में लागू करने का प्रयास कर रहे हैं।
मुनरो डॉक्ट्रिन के तहत अमेरिका का उद्देश्य लैटिन अमेरिकी देशों को अपने प्रभाव क्षेत्र में रखना था। हालांकि, अब संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिकी प्रशासन एक बार फिर उसी नीति को नए रूप में आगे बढ़ा रहा है। इसी क्रम में, वेनेजुएला के बाद ट्रंप ने क्यूबा और कोलंबिया को भी चेतावनी देकर अपनी मंशा के संकेत दिए हैं। दरअसल, अमेरिका की लंबे समय से यह इच्छा रही है कि क्यूबा, वेनेजुएला और कोलंबिया जैसे देश उसकी नीतियों के अनुरूप काम करें। वहीं, क्यूबा और वेनेजुएला के साथ अमेरिका के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। इसके अलावा, ट्रंप कई बार यह साफ कर चुके हैं कि वे लैटिन अमेरिका को अमेरिकी प्रभाव के दायरे में देखना चाहते हैं।
Don-roe डॉक्ट्रिन और अमेरिकी प्रभुत्व की कोशिश
इस संदर्भ में, अल जजीरा के लिए काम करने वाले पत्रकार जॉन हॉलमैन का कहना है कि यह घटनाक्रम एक तय पैटर्न की ओर इशारा करता है। उनके मुताबिक, ट्रंप प्रशासन उन देशों को निशाना बना रहा है, जिनकी विचारधारा वामपंथी मानी जाती है। इसके साथ ही, क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व को मजबूत करने की कोशिश भी की जा रही है। हॉलमैन के अनुसार, ट्रंप लैटिन अमेरिका को अमेरिका का प्रभाव क्षेत्र मानते हैं। इसलिए, मादुरो के खिलाफ की गई कार्रवाई और अन्य देशों को दी गई धमकियों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
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वेनेजुएला के बाद क्यूबा और कोलंबिया को चेतावनी
इसी बीच, वेनेजुएला में कार्रवाई के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा और कोलंबिया को भी धमकी दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कोलंबिया का नेतृत्व कोकीन के कारोबार में शामिल है और मादक पदार्थ अमेरिका भेजे जा रहे हैं। इसी आधार पर, ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि इन देशों के खिलाफ भी वेनेजुएला जैसी कार्रवाई हो सकती है।
वहीं दूसरी ओर, एक अन्य विश्लेषक डेविड स्मिथ का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप के कदमों का अनुमान लगाना आसान नहीं होता। उनके अनुसार, ट्रंप अक्सर सीधे तौर पर न कहकर संकेतों के जरिए अपनी मंशा जाहिर करते हैं। इसी वजह से, वेनेजुएला में की गई कार्रवाई को कई देशों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, ट्रंप ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अगर कोई देश अमेरिकी रुख के खिलाफ जाता है, तो उसे सख्त कदमों का सामना करना पड़ सकता है।
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