छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में तेंदुए के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार राहत की सांस ली। पिछले तीन दिनों से वन विभाग की टीमें तेंदुए को पकड़ने का प्रयास कर रही थीं। हालांकि, पिंजरे और थर्मल ड्रोन कैमरे भी उसे पकड़ने में नाकाम रहे। शुक्रवार, 16 अक्टूबर की सुबह आमानारा गांव में तेंदुए ने फिर हमला किया। इस बार उसने सुरेश मरकाम की तीन साल की बेटी सुहानी को निशाना बनाया। अपनी बच्ची को खतरे में देखकर सुरेश ने तुरंत तेंदुए को पीछे से पकड़ लिया। इसके बाद आसपास मौजूद ग्रामीणों ने लाठी और रस्सियों की मदद से उसे काबू कर लिया। ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम के पहुंचने तक तेंदुए को पकड़े रखा। इस घटना के बाद इलाके में फैली दहशत कुछ कम हुई।
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बेटी को बचाने के लिए पिता ने जोखिम में डाली जान
यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 7:30 बजे आमानारा गांव में हुई। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में घुसे तेंदुए ने पहले तीन लोगों पर हमला किया। इससे पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान तेंदुए ने सुरेश मरकाम की तीन साल की बेटी सुहानी पर हमला कर दिया। अपनी बच्ची को बचाने के लिए सुरेश ने बिना देर किए तेंदुए को पीछे से जकड़ लिया। उन्होंने उसके पिछले पैर पकड़कर उसे काबू करने की कोशिश की। पिता की हिम्मत देखकर दूसरे ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने लाठियों और रस्सियों की मदद से तेंदुए को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे बांधकर वन विभाग को सूचना दी। सुरेश की इस बहादुरी ने उनकी बेटी की जान बचाने के प्रयास में अहम भूमिका निभाई।
तेंदुए ने पिछले तीन दिनों से धमतरी के आसपास के इलाकों में दहशत फैला रखी थी। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 12 गांवों के लोग उसके हमलों से परेशान थे। लोग डर के कारण घरों से बाहर निकलने से भी कतरा रहे थे। इस दौरान तेंदुए के हमले में पांच महीने की गर्भवती महिला रामशिला मांडवी और प्रभु लाल मंडावी की मौत हो गई। रामशिला की उम्र 25 वर्ष थी, जबकि प्रभु लाल 45 वर्ष के थे। लगातार हमलों के कारण कारीपानी, बस्तर बुडरा और आमानारा के ग्रामीणों में भारी नाराजगी थी। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि विभाग तेंदुए को पकड़ने में सफल नहीं हुआ। आखिरकार, ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर उसे पकड़ना पड़ा।
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वन विभाग ने लगाए पिंजरे, थर्मल ड्रोन से भी की तलाश
सीतानदी टाइगर रिजर्व के डीएफओ वरुण जैन के मुताबिक, वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए कई प्रयास किए थे। विभाग ने जंगल सफारी से विशेषज्ञों की टीम बुलाई थी। इसके अलावा, इलाके में पिंजरे लगाए गए और थर्मल ड्रोन कैमरों की मदद से तेंदुए की तलाश की गई। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद तेंदुआ पकड़ में नहीं आया। शुक्रवार सुबह तेंदुए के गांव में घुसने के बाद ग्रामीणों ने उसे काबू कर लिया। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद अधिकारियों ने तेंदुए को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की। इस घटना ने वन्यजीवों के हमलों से प्रभावित गांवों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
तेंदुए के हमलों में घायलों की संख्या को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग के आंकड़ों में अंतर है। स्थानीय लोगों का दावा है कि तीन दिनों में 19 से अधिक लोग घायल हुए। वहीं, डीएफओ वरुण जैन ने 12 लोगों के घायल होने की पुष्टि की। इनमें दो लोगों की मौत हुई। वन विभाग घायलों की सूची तैयार करने और उनके इलाज में मदद करने की बात कह रहा है। तेंदुए में रेबीज होने की आशंका भी जताई गई है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, तेंदुए को जीवित पकड़ने में साहस दिखाने वाले ग्रामीणों को सम्मानित किया जाएगा। तेंदुए के पकड़े जाने से आसपास के गांवों में लोगों ने राहत महसूस की है। हालांकि, इस घटना ने वन विभाग की तैयारियों और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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