CJI सूर्यकांत ने कहा कि मामले की सुनवाई के लिए विशेष बेंच बनाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में किसी भी प्रकार की अनुचित कोशिशों को अस्वीकार किया। अदालत ने कहा कि जजों को मामले से अलग करवाने की रणनीति स्वीकार्य नहीं। ऐसे प्रयास न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते। मुख्य न्यायाधीश ने चेतावनी दी कि दोषियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते। अदालत ने वकीलों से भी जिम्मेदारी और पेशेवर आचरण बनाए रखने को कहा।
Also Read : भवानीपुर चुनाव हार को ममता बनर्जी ने चुनौती दी, कलकत्ता हाईकोर्ट में खुद याचिका दाखिल की
CJI: हाईकोर्ट को दिए गए स्पष्ट निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारी अमरीश कुमार जैन के मामले में सख्त रुख अपनाया। यह मामला वर्ष 2022 से लंबित है और लगातार चर्चा में बना। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चार जज सुनवाई से स्वयं अलग हो चुके। इनमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश शील नागू का नाम भी प्रमुख रूप से शामिल है। बार-बार जजों के अलग होने से मामले की सुनवाई प्रभावित होती रही। इसी स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को नई डिवीजन बेंच गठित करने को कहा। पीठ ने निर्देश दिया कि दो जजों की बेंच नियमित सुनवाई शुरू करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुनवाई प्रतिदिन जारी रहनी चाहिए बिना रुकावट। फैसला सुरक्षित होने तक मामले को लगातार प्राथमिकता देने का आदेश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी पर भी चिंता व्यक्त की।
Also Read : नोएडा-जेवर एयरपोर्ट रूट पर इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू, सीएम योगी ने किया शुभारंभ
संजीव चतुर्वेदी मामले का भी हुआ उल्लेख
सुनवाई के दौरान आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामले का भी उल्लेख हुआ। उस मामले में भी कई न्यायाधीश सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके। कुल सोलह जज विभिन्न चरणों में मामले की सुनवाई छोड़ चुके थे। बार-बार रिक्यूजल होने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बढ़ी थी। अदालत ने ऐसे मामलों को न्याय प्रणाली के लिए चुनौतीपूर्ण बताया। न्यायपालिका ने समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
अमरीश कुमार जैन का मामला अब न्यायिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय। इससे पहले अतीक अहमद से जुड़े मामले में भी कई जज अलग हुए। लगातार बढ़ती ऐसी घटनाओं ने न्यायिक प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए। सुप्रीम कोर्ट अब मामले की निष्पक्ष और प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित करना चाहता। नई बेंच के गठन से सुनवाई प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। सभी पक्ष अब आगामी सुनवाई और न्यायालय के अंतिम निर्णय पर नजर लगाए हुए हैं।
Also Read : भवानीपुर चुनाव हार को ममता बनर्जी ने चुनौती दी, कलकत्ता हाईकोर्ट में खुद याचिका दाखिल की


More Stories
The increasing fiscal responsibilities of the RBI
Smriti Mandhana’s Latest T20I Record Stuns Cricket World
‘आई लव यू… सॉरी’, सुसाइड नोट छोड़ NEET छात्रा ने उठाया खौफनाक कदम