Bombay: मुंबई से साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर ऑनलाइन फ्रॉड के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है। Bombay से जुड़ी इस घटना में बॉम्बे हाई कोर्ट के एक जज को ठगों ने अपना निशाना बनाया और उनके खाते से लाखों रुपये निकाल लिए। पुलिस ने इस मामले में झारखंड के जामताड़ा से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो पहले भी कई साइबर ठगी के मामलों में शामिल रह चुका है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान 25 वर्षीय मजहर आलम इसराइल मियां के रूप में हुई है। वह झारखंड के जामताड़ा का रहने वाला है और उसके खिलाफ देश के कई राज्यों में साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी कम से कम 10 राज्यों में दर्ज 36 मामलों से जुड़ा हुआ है। मुंबई पुलिस ने जामताड़ा साइबर सेल और करमाटांड़ पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार किया।
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Bombay में कैसे हुई यह साइबर ठगी?
पूरा मामला 28 फरवरी का बताया जा रहा है। जज अपने क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट्स रिडीम करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन नंबर लगातार व्यस्त मिला। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट पर दूसरा नंबर खोजा, जो वास्तव में साइबर ठगों द्वारा डाला गया फर्जी कस्टमर केयर नंबर था।
जैसे ही जज ने उस नंबर पर कॉल किया, दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति ने खुद को बैंक का अधिकारी बताया। उसने भरोसा जीतने के लिए जज से सामान्य बातचीत की और फिर एक लिंक भेज दिया। ठग ने कहा कि उस लिंक से एक ऐप डाउनलोड करना होगा, जिससे रिवॉर्ड पॉइंट्स आसानी से रिडीम हो जाएंगे।
हालांकि, भेजा गया ऐप जज के iPhone में काम नहीं कर रहा था। इसके बाद आरोपी ने उन्हें Android फोन इस्तेमाल करने की सलाह दी। जज ने ठग की बातों पर भरोसा किया और घर में काम करने वाली महिला के Android फोन में अपना सिम कार्ड डाल दिया। इसके बाद उन्होंने वही ऐप डाउनलोड किया और उसमें अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी भर दी।
ठगी का पता कैसे चला और पुलिस ने क्या किया?
ऐप में कार्ड डिटेल्स डालने के कुछ ही समय बाद जज के खाते से करीब 6.02 लाख रुपये निकाल लिए गए। जब उन्हें बैंक से ट्रांजैक्शन की जानकारी मिली, तब उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ बड़ी ठगी हो चुकी है। इसके तुरंत बाद उन्होंने मुंबई की कफ परेड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
Bombay पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। करीब 10 दिनों की जांच के बाद पुलिस आरोपी तक पहुंचने में सफल रही। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी लोगों को फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिए फंसाता था। इसके बाद वह APK फाइल या ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल और बैंकिंग जानकारी हासिल करता था।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी का नंबर केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही लें। इंटरनेट पर दिखने वाले हर नंबर पर भरोसा नहीं करना चाहिए। साथ ही, किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या APK फाइल डाउनलोड करने से पहले पूरी जांच करनी चाहिए। Bombay में सामने आया यह मामला साफ दिखाता है कि साइबर ठग अब आम लोगों के साथ-साथ बड़े पदों पर बैठे लोगों को भी निशाना बना रहे हैं। इसलिए हर व्यक्ति को ऑनलाइन सतर्क रहने की जरूरत है।
Bombay से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान कर सकती है।
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