मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी की चर्चाओं के बाद यह मामला भी सुर्खियों में आ गया है। आरोपों के अनुसार, मंदिर में श्रद्धालुओं से मिलने वाले नकद दान, चढ़ावे और सोने-चांदी के आभूषणों के प्रबंधन में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और विस्तृत जांच के आदेश जारी किए। प्रशासन अब सभी वित्तीय लेन-देन और दान प्रबंधन की प्रक्रिया की गहन जांच कर रहा है।
बगलामुखी मंदिर: निजी समिति पर दान और चढ़ावे की राशि में अनियमितता के गंभीर आरोप
शिकायतों के अनुसार, मंदिर में आधिकारिक सरकारी प्रबंधन समिति के समानांतर एक गैर-शासकीय और अपंजीकृत समिति सक्रिय रही। इस समिति ने कथित रूप से श्रद्धालुओं से नकद दान, चढ़ावा और कीमती आभूषण सीधे स्वीकार किए। आरोप है कि समिति ने प्राप्त राशि को सरकारी खातों में जमा करने के बजाय निजी बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि इन लेन-देन का कोई पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इन आरोपों ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली और दान प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला कलेक्टर प्रीति यादव ने हाल ही में मंदिर का औचक निरीक्षण किया और शिकायतों का प्राथमिक स्तर पर परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें दान राशि और मंदिर के वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी कई शिकायतें प्राप्त हुईं। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का निर्णय लिया। प्रशासन ने मंदिर के गर्भगृह के सौंदर्यीकरण कार्यों में हुए खर्च और धन के स्रोतों की भी जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह भी पता लगाएंगे कि निर्माण और विकास कार्यों में किस समिति ने धन का उपयोग किया तथा उसका लेखा-जोखा कितना पारदर्शी रहा।
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कलेक्टर ने गठित की तीन सदस्यीय जांच समिति, सात दिनों में मांगी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश देते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इस समिति की अध्यक्षता जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.एस. सोलंकी करेंगे। जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नलखेड़ा की मुख्य नगरपालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल को समिति का सदस्य बनाया गया है। जांच दल वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, दान रजिस्टर और संबंधित दस्तावेजों की विस्तार से जांच करेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
प्रशासन ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि मंदिर में दान देने वाले श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच टीम सभी तथ्यों और दस्तावेजों की निष्पक्ष समीक्षा करेगी तथा निर्धारित समय सीमा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस मामले ने धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।


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