हाई-वैल्यू एंटी-डायबिटिक इंजेक्शन के नाम पर नकली माउनजारो इंजेक्शन का बड़ा कारोबार सामने आया है। मामले का मुख्य आरोपित अवि शर्मा पूरे देश में सप्लाई नेटवर्क तैयार करने की योजना बना रहा था। जांच में पता चला कि वह अलग-अलग राज्यों में कारोबारियों से संपर्क कर अपने नेटवर्क को तेजी से फैलाना चाहता था। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते गिरफ्तारी होने से एक बड़ा फर्जी दवा गिरोह सक्रिय होने से पहले ही पकड़ा गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अवि शर्मा ग्राहकों और कारोबारियों को आकर्षित करने के लिए भारी छूट दे रहा था। 27 से 28 हजार रुपये कीमत वाले इंजेक्शन पर वह 28 प्रतिशत तक डिस्काउंट ऑफर कर रहा था, जबकि अधिकृत कंपनी अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही छूट देती है। इसी असामान्य छूट ने कई लोगों को उसकी ओर आकर्षित किया। शुरुआती जांच में सामने आया कि हैदराबाद से छह लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से इन इंजेक्शनों की डिलीवरी भी कराई थी।
पिछले सप्ताह शनिवार शाम सेक्टर-29 थाना क्षेत्र स्थित सुपरमार्ट-वन के पास पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई की। टीम ने एक स्विफ्ट डिजायर कार से 2.5 एमजी से 15 एमजी तक की विभिन्न डोज के संदिग्ध इंजेक्शन बरामद किए। बरामद खेप को जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती तौर पर यह नकली दवाओं का बड़ा नेटवर्क प्रतीत हो रहा है।
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नकली इंजेक्शन नेटवर्क के राज खुल रहे
फिलहाल मुख्य आरोपित अवि शर्मा पांच दिन की रिमांड पर है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में उसने कई राज्यों के कारोबारियों से संपर्क करने की बात स्वीकार की है। जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि बिना लाइसेंस वह किन कारोबारियों से सौदेबाजी कर रहा था और उसके नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
अधिकारियों का कहना है कि अगर यह नेटवर्क पूरी तरह खड़ा हो जाता तो नकली इंजेक्शन देशभर के बाजारों में आसानी से पहुंच सकते थे। ऐसे इंजेक्शन मरीजों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। एंटी-डायबिटिक और वजन घटाने वाले इंजेक्शनों की बढ़ती मांग का फायदा उठाकर आरोपित बाजार में फर्जी दवाओं की सप्लाई बढ़ाना चाहता था।
साइबर सिटी में पिछले चार वर्षों के दौरान नकली दवाओं के कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2023 से 2026 के बीच नकली इंजेक्शन और दवाओं के चार बड़े खुलासों में विदेशी नागरिक समेत 10 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। ताजा माउनजारो इंजेक्शन मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दवा बाजार में सक्रिय फर्जी नेटवर्क अब भी बड़ा खतरा बने हुए हैं।
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