छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पुलिस विभाग के भीतर सामने आए करीब 2 करोड़ रुपये के कथित वेतन घोटाले ने सभी को चौंका दिया है। इस पूरे मामले का खुलासा AI आधारित ऑडिट के जरिए हुआ, जिसने वेतन भुगतान में असामान्य बढ़ोतरी की पहचान की। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने वेतन रिकॉर्ड में बदलाव कर सरकारी धन का गलत तरीके से उपयोग किया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह गड़बड़ी कई महीनों से लगातार चल रही थी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।
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जांच के बाद तीन पुलिसकर्मी गिरफ्तार, कई पहलुओं की पड़ताल जारी
बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने बताया कि विभाग ने नियमित आंतरिक और बाहरी ऑडिट कराया था। इसी प्रक्रिया के दौरान AI टूल्स ने वेतन खर्च में असामान्य पैटर्न दर्ज किया। इसके बाद अधिकारियों ने वेतन रिकॉर्ड, डिजिटल फाइलों और बैंक लेन-देन की बारीकी से जांच शुरू की। जांच में आरक्षक गिरीश राय, राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू की भूमिका सामने आई। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जांच एजेंसियां अब इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।
पूछताछ के दौरान गिरीश राय ने वेतन रिकॉर्ड में हेराफेरी करने की बात स्वीकार की। जांच के अनुसार, वह वेतन तैयार होने से पहले सॉफ्ट कॉपी में बदलाव करता था और अपना तथा दो अन्य कर्मचारियों का वेतन बढ़ा देता था। इसके बाद अतिरिक्त राशि सरकारी खाते से उनके खातों में पहुंच जाती थी। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने अक्टूबर 2023 से मई 2026 के बीच करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक की रकम अवैध रूप से निकाली। अधिकारियों ने बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर इन लेन-देन की पुष्टि की है। मामले में वित्तीय रिकॉर्ड की भी विस्तृत जांच जारी है।
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AI आधारित ऑडिट में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
पुलिस गिरीश राय को इस पूरे कथित घोटाले का मास्टरमाइंड मान रही है। वह वर्ष 2012 से एसपी कार्यालय की वेतन शाखा में कार्यरत था और अनुकंपा नियुक्ति के आधार पर सेवा में आया था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने कुछ कर्मचारियों का वेतन लोन देने के नाम पर बढ़ाया। बाद में वह बढ़ी हुई राशि को लोन की किस्त या वापसी बताकर नकद वापस ले लेता था। पुलिस ने ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर ली है और उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस प्रक्रिया में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस विभाग में हर महीने कर्मचारियों के तबादले, नई नियुक्तियों और संख्या में बदलाव के कारण वेतन खर्च स्वाभाविक रूप से बदलता रहता है। इसी वजह से आरोपियों ने लंबे समय तक छोटी-छोटी रकम बढ़ाकर गड़बड़ी को छिपाए रखा। किसी को इस अनियमितता पर तुरंत संदेह नहीं हुआ। आखिरकार AI आधारित ऑडिट ने असामान्य वित्तीय पैटर्न पकड़ लिया और पूरे मामले का खुलासा कर दिया। इसके बाद पुलिस ने 29 जून को तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और सरकारी धन के गबन समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। अदालत में पेशी के बाद न्यायालय ने तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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