सुप्रीम कोर्ट ने दहेज और घरेलू हिंसा कानूनों में सुधार की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इन कानूनों में कोई बदलाव लाने के लिए समाज में बदलाव की जरूरत है, और इस मामले में न्यायालय कुछ नहीं कर सकता।
याचिका में यह तर्क प्रस्तुत किया गया था कि मौजूदा दहेज और घरेलू हिंसा कानूनों का गलत तरीके से दुरुपयोग हो रहा है, जिसके कारण निर्दोष लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
याचिका में इस समस्या के समाधान के लिए कानूनों में सुधार की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि समाज में इस तरह के मुद्दों पर जागरूकता और बदलाव लाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
हाल ही में बंगलूरू में एक इंजीनियर ने आत्महत्या कर ली थी, जिसने अपनी पत्नी पर कानूनी रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया था।
Also Read : क्रिस मार्टिन ने कोल्डप्ले कॉन्सर्ट के आखिरी दिन ‘वंदे मातरम’ गाया, सबकी आँखों में आंसू थे
दहेज और घरेलू हिंसा कानूनों में सुप्रीम कोर्ट ने सुधार की मांग, याचिका में नए प्रावधान की अपील
उसने कानून में कथित खामियों के बारे में भी शिकायत की थी। इस घटना के बाद समाज में दहेज और घरेलू हिंसा कानूनों के गलत इस्तेमाल को लेकर बहस शुरू हो गई।
इसके परिणामस्वरूप, सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें इन कानूनों में सुधार की मांग की गई। यह याचिका वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों, वकीलों और कानूनी विशेषज्ञों की एक समिति बनाने की अपील की गई थी, जो मौजूदा दहेज और घरेलू हिंसा कानूनों की समीक्षा कर सके।
याचिका में यह भी कहा गया कि शादी के पंजीकरण के दौरान शादी में मिलने वाले सामान और उपहारों को भी पंजीकृत करने का एक प्रावधान होना चाहिए, ताकि भविष्य में इनसे संबंधित किसी भी तरह के विवाद को सही तरीके से निपटाया जा सके।
Also Read : महिलाओं को 2100 रुपए, बुजुर्गों का फ्री इलाज, पानी के बिल माफ होंगे
याचिका में सुधार के प्रस्ताव पारदर्शिता, सही पहचान और पुरुषों के अधिकारों का संरक्षण
याचिका में यह तर्क दिया गया कि इस कदम से न केवल कानूनी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा सकेगा, बल्कि यह दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा के मामलों में पारिवारिक विवादों की सही तरीके से पहचान करने में भी मदद करेगा।
इसके अलावा, याचिका में साल 2010 में आईपीसी की धारा 498A पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई टिप्पणियों को लागू करने की भी मांग की गई थी।
इस फैसले में कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के मामलों में कुछ सुधार की आवश्यकता की बात की थी, और याचिका में उसी सुधार को लागू करने की अपील की गई है।
याचिका का मुख्य उद्देश्य यह था कि कानून में सुधार से निर्दोष पुरुषों के खिलाफ हो रहे गलत मुकदमों को रोका जा सके और उनके अधिकारों का संरक्षण किया जा सके।
Also Read : शेयर बाजार में बड़ी गिरावट; सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निफ्टी 22800 के नीचे आया
सुधारों से महिलाओं की सुरक्षा और समानता की ओर कदम
साथ ही, यह भी कहा गया कि ऐसे सुधारों से दहेज और घरेलू हिंसा कानूनों का असली उद्देश्य, यानी महिलाओं की सुरक्षा, भी सही तरीके से पूरा होगा।
याचिका में यह जोर दिया गया कि कानूनों में सुधार की प्रक्रिया समाज में न्याय और समानता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है, ताकि कोई भी पक्ष, चाहे वह पुरुष हो या महिला, कानून के गलत इस्तेमाल से बच सके।
Also Read : Mahakumbh 2025 : हर दिन आठ हजार से अधिक लोग ले रहे हैं डिजिटल कुंभ का आनंद, AI करा रही है ‘नारायण’ से बात


More Stories
Rajdhani Express Delayed Near Mumbai Due to Heavy Rain, Passengers Face Long Wait
हिमाचल के लाहौल-स्पीति में बड़ा हादसा: वाहन पर गिरी चट्टान, एक की मौत; 13 लोग मलबे में दबे, रेस्क्यू जारी
Jai Kisan Sangathan Leader Suspends Hunger Strike After MP Govt Agrees to Fresh Rehabilitation Survey