पांढुर्णा तहसील के कौड़ियां गांव निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग की मंगलवार को मौत हुई। उन्हें कोरोना संक्रमण के कारण नागपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था। सोमवार शाम अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें सिविल अस्पताल लाया। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक और ऑक्सीजन की कमी की पुष्टि की। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत नागपुर रेफर किया गया। बुजुर्ग को एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां पर इलाज के दौरान मंगलवार शाम को उन्होंने दम तोड़ दिया। यह खबर मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई।
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पांढुर्णा के बुजुर्ग की कोरोना से नागपुर में इलाज के दौरान मौत
परिजनों ने बताया कि बुजुर्ग को लंबे समय से बुखार और कमजोरी की शिकायत थी। सोमवार शाम को अचानक सांस लेने में तकलीफ शुरू हो गई। पांढुर्णा सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच की। उन्होंने हार्ट अटैक के लक्षण और ऑक्सीजन लेवल में गिरावट पाई। बिना देरी किए मरीज को नागपुर रेफर कर दिया गया। रास्ते में उनकी हालत और खराब होती चली गई। नागपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया। ऑक्सीजन की लगातार कमी से उनकी स्थिति नहीं सुधरी। अंततः उन्होंने मंगलवार को अंतिम सांस ली।
नागपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया। मरीज की मृत्यु के बाद शव परिजनों को नहीं सौंपा गया। मेडिकल स्टाफ ने परिसर में ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। परिजनों को दूर से अंतिम दर्शन कराए गए। रिपोर्ट आने से पहले ही पूरे परिसर को सैनिटाइज किया गया। डॉक्टरों ने परिवार को संक्रमण के खतरे से सतर्क रहने को कहा। अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा के सभी मानक अपनाए गए। किसी को भी नजदीक जाने की अनुमति नहीं दी गई।
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कोरोना प्रोटोकॉल के तहत शव नहीं सौंपा गया परिजनों को
बुधवार को जब कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। पांढुर्णा सिविल अस्पताल के बीएमओ ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग ने कौड़ियां गांव में सर्वे शुरू करवाया। घरवालों और संपर्क में आए लोगों की स्वास्थ्य जांच हुई। फिलहाल कोई नया पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया है। फिर भी स्वास्थ्य टीम को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। गांव में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य किया गया है। लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है।
डॉक्टरों के अनुसार, मृतक बुजुर्ग को कई पुरानी बीमारियां पहले से थीं। यूरीन इंफेक्शन और हार्ट अटैक का इलाज पहले भी चल रहा था। इस बार ब्लड रिपोर्ट में कोविड संक्रमण की पुष्टि हुई। हालांकि आरटीपीसीआर टेस्ट नहीं किया गया था। मरीज की हालत गंभीर थी, इसलिए समय नहीं मिला। कोरोना के साथ हार्ट अटैक ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिरता चला गया। डॉक्टरों ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से बेहतर सुविधा की मांग की है।
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