पहले भारत का संबंध वेनेज़ुएला के तेल से काफी मजबूत था। उस समय भारतीय रिफाइनरियां वहां से भारी कच्चा माल नियमित रूप से मंगाती थीं। लेकिन अमेरिका द्वारा लगाए गए सख़्त प्रतिबंधों के कारण यह आपूर्ति रुक गई। इससे भारत की ऊर्जा रणनीति पर असर पड़ा। कंपनियों को रूस और अन्य देशों से विकल्प तलाशने पड़े। अब अमेरिकी लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क के तहत पाबंदियों में ढील मिलने के बाद हालात बदल रहे हैं। इसी कारण वेनेज़ुएला से तेल निर्यात फिर तेज होता दिख रहा है।
हाल ही में अमेरिकी कंपनी शेवरॉन ने वेनेज़ुएला का एक बड़ा कार्गो रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को बेचा। यह 2023 के बाद पहली बड़ी डील मानी जा रही है। रिलायंस ने लगभग 2 मिलियन बैरल की खेप खरीदी। इससे संकेत मिलता है कि भारत फिर से इस लैटिन अमेरिकी देश के ऊर्जा संसाधनों पर भरोसा जता रहा है।
इसके अलावा इंडियन ऑयल कॉर्प, भारत पेट्रोलियम और HPCL मित्तल एनर्जी ने भी भारी ग्रेड का तेल मंगाया है। इससे स्पष्ट है कि भारतीय रिफाइनरियां आपूर्ति स्रोतों में विविधता ला रही हैं।
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तेल आयात में बदलाव से बढ़ेगी ऊर्जा सुरक्षा
भारत अब अमेरिका, रूस और वेनेज़ुएला के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। इस समय वेनेज़ुएला का तेल अन्य विकल्पों की तुलना में किफ़ायती साबित हो सकता है। हालांकि वैश्विक बाजार में कीमतों और मार्जिन की चुनौती बनी हुई है। फिर भी बड़े सुपरटैंकरों के इस्तेमाल से फ्रेट खर्च कम होगा। साथ ही सप्लाई प्रक्रिया भी तेज होगी।
अंत में, वेनेज़ुएला से तेल आयात का यह नया दौर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकता है। कुल मिलाकर, वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार में यह एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
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