Stock Market Holiday: मार्च के अंतिम सप्ताह से लेकर अप्रैल की शुरुआत तक शेयर बाजार में लगातार छुट्टियों का असर देखने को मिलेगा। इसके चलते कुल 8 दिनों की अवधि में 3 दिन बाजार बंद रहेगा। इस दौरान बीएसई और NSE में ट्रेडिंग गतिविधियां सीमित रहेंगी, इसलिए निवेशकों को अपने फैसले सोच-समझकर लेने होंगे। सबसे पहले 26 मार्च (गुरुवार) को श्री राम नवमी के अवसर पर बाजार बंद रहेगा। इसके बाद महावीर जयंती और गुड फ्राइडे के कारण भी ट्रेडिंग नहीं होगी, जिससे बाजार में रुक-रुक कर गतिविधि देखने को मिलेगी।
छुट्टियों का असर और ट्रेडिंग शेड्यूल
दरअसल, मार्च के आखिरी सप्ताह और अप्रैल की शुरुआत आमतौर पर काफी सक्रिय ट्रेडिंग का समय होता है। हालांकि, इस बार लगातार छुट्टियों के कारण इसमें बाधा देखने को मिलेगी। कुल 8 ट्रेडिंग दिनों में से 3 दिन बाजार बंद रहने से सेशन्स सीमित हो जाएंगे। इससे लिक्विडिटी और निवेशकों की भागीदारी पर असर पड़ सकता है। खासकर 31 मार्च से 3 अप्रैल के बीच केवल 3 ही ट्रेडिंग सेशन होंगे। इसलिए निवेशकों पर कम समय में फैसले लेने का दबाव बढ़ सकता है।
साथ ही, छुट्टियों के बीच ग्लोबल मार्केट्स में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर सीधे अगले सेशन में दिख सकता है। इसके कारण बाजार गैप-अप या गैप-डाउन के साथ खुलने की संभावना रहती है। यही वजह है कि कई निवेशक इस अवधि को लंबे वीकेंड की तरह देखते हैं। ऐसे समय में सक्रिय ट्रेडिंग कम और सतर्कता अधिक जरूरी हो जाती है।
6 मार्च – श्रीराम नवमी
31 मार्च – महावीर जयंती
3 अप्रैल – गुड फ्राइडे
14 अप्रैल – अंबेडकर जयंती
1 मई – महाराष्ट्र दिवस
28 मई – बकरीद
26 जून – मुहर्रम
14 सितंबर – गणेश चतुर्थी
2 अक्टूबर – गांधी जयंती
20 अक्टूबर – दशहरा
10 नवंबर – दिवाली (बलिप्रतिपदा)
24 नवंबर – गुरु नानक जयंती
25 दिसंबर – क्रिसमस
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निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
लगातार छुट्टियों के कारण ट्रेडिंग दिनों में कमी आती है। इसलिए बाजार में वोलैटिलिटी बढ़ने की संभावना रहती है। कम समय में ज्यादा ट्रेडिंग गतिविधियां केंद्रित हो जाती हैं, जिससे अचानक बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा, ऐसे समय में ग्लोबल मार्केट्स का प्रभाव भी अधिक स्पष्ट होता है। क्योंकि घरेलू बाजार सीमित समय के लिए खुला रहता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर सीधे अगले ट्रेडिंग सेशन में दिखता है। इस वजह से कई बार बाजार गैप-अप या गैप-डाउन के साथ खुल सकता है। साथ ही, कम ट्रेडिंग सेशन्स के दौरान लिक्विडिटी में भी कमी देखी जा सकती है। इससे बड़े ऑर्डर्स का प्रभाव कीमतों पर अधिक पड़ता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें अपनी पोजिशन साइज नियंत्रित रखनी चाहिए और स्टॉप-लॉस का पालन करना चाहिए। साथ ही, ओवरट्रेडिंग से बचना भी जरूरी है। वहीं, दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह समय घबराने का नहीं है। उन्हें अपने निवेश को स्थिर बनाए रखना चाहिए। क्योंकि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबे समय में बाजार के मूलभूत कारक अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। कुल मिलाकर, छुट्टियां निवेशकों को सोचने का अवसर देती हैं। हालांकि, कम ट्रेडिंग सेशन्स के कारण बाजार में तेजी से बदलाव भी संभव है। इसलिए सतर्कता और संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखना बेहद जरूरी है।
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