July 31, 2026

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NRI क्यों बेच रहे हैं भारत की प्रॉपर्टी? 46% ने तुरंत बिक्री की जताई इच्छा

भारत के NRI रियल एस्टेट बाजार में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसकी वजह सिर्फ नए प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीय यानी एनआरआई भी बन सकते हैं। रेमिटर की एनआरआई वेल्थ रिपोर्ट 2026 के अनुसार, बड़ी संख्या में एनआरआई भारत में खरीदी गई NRI अपनी संपत्तियां बेचने की तैयारी कर रहे हैं। सर्वे में शामिल 46 प्रतिशत NRI एनआरआई प्रॉपर्टी मालिकों ने कहा कि वे अपनी संपत्ति तुरंत बेचना चाहते हैं, जबकि 26 प्रतिशत लोग अगले छह महीनों के भीतर बिक्री की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि इनमें से आधे से अधिक NRI निवेशक बिक्री से मिलने वाली रकम भारत में दोबारा निवेश करने के बजाय विदेश ले जाना चाहते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010 से 2019 के बीच एनआरआई निवेशकों ने भारतीय रियल एस्टेट में बड़े पैमाने पर निवेश किया था। उस समय कई लोगों ने भविष्य में भारत लौटने, परिवार के लिए घर सुरक्षित रखने या लंबी अवधि के निवेश के उद्देश्य से संपत्तियां खरीदी थीं। अब उसी दौर में खरीदी गई बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी दोबारा बाजार में बिक्री के लिए आ रही हैं। रिपोर्ट बताती है कि रीसेल के लिए उपलब्ध 60 प्रतिशत से अधिक संपत्तियां इसी अवधि में खरीदी गई थीं। इनमें लगभग 89 प्रतिशत आवासीय प्रॉपर्टी शामिल हैं। इससे साफ है कि एनआरआई अब घरों को केवल रहने की जरूरत नहीं, बल्कि निवेश का साधन मान रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव निवेशकों की सोच में आए परिवर्तन को दर्शाता है, जहां संपत्ति को भावनात्मक जुड़ाव से अधिक आर्थिक संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है।

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2010-19 में खरीदी गई संपत्तियां अब बाजार में

रेमिटर के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शानू नायर का कहना है कि एनआरआई की निवेश रणनीति तेजी से बदल रही है। विदेशों में बढ़ती होम लोन की लागत, बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च, रिटायरमेंट की तैयारी, टैक्स नियमों में बदलाव और निवेश में विविधता लाने की जरूरत उन्हें नए फैसले लेने के लिए प्रेरित कर रही है। कई एनआरआई अब अपनी भारतीय संपत्तियां बेचकर पूंजी को उन देशों में निवेश करना चाहते हैं जहां वे वर्तमान में रह रहे हैं। कुछ लोग शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, अंतरराष्ट्रीय रियल एस्टेट और अन्य वित्तीय साधनों को भी बेहतर विकल्प मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भारतीय बाजार से भरोसा खत्म होने का संकेत नहीं है, बल्कि बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और व्यक्तिगत वित्तीय योजनाओं के अनुरूप निवेश को व्यवस्थित करने की रणनीति का हिस्सा है।

रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार में कमजोरी इस बिक्री का मुख्य कारण नहीं है। इसके बजाय एनआरआई अपनी संपत्ति और निवेश पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से संतुलित करना चाहते हैं। हालांकि संपत्ति बेचने की प्रक्रिया उनके लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 81.4 प्रतिशत विक्रेताओं को अभी तक उपयुक्त खरीदार नहीं मिला है। विदेश में रहने के कारण दस्तावेज तैयार करना, खरीदारों से बातचीत करना, कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना और लेनदेन की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। कई मामलों में भरोसेमंद प्रतिनिधि की कमी और स्थानीय बाजार की जानकारी का अभाव भी बिक्री की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं और बेहतर कानूनी सहायता से इन चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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प्रॉपर्टी बेचने में किन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं NRI

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में एनआरआई अपनी संपत्तियां बेचते हैं तो कुछ प्रमुख शहरों में रीसेल मकानों की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और खरीदारों के पास अधिक विकल्प मौजूद होंगे। हालांकि घरेलू आवासीय मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है, इसलिए इस बदलाव का असर हर शहर में समान नहीं होगा। जिन क्षेत्रों में एनआरआई निवेश अधिक है, वहां इसका प्रभाव अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई दे सकता है। दूसरी ओर, डेवलपर्स और रियल एस्टेट कंपनियां भी बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीतियां तैयार कर रही हैं। आने वाले महीनों में एनआरआई निवेशकों के फैसले भारतीय रियल एस्टेट बाजार की दिशा, रीसेल सेगमेंट की गतिविधियों और संपत्ति की कीमतों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

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