भारत सरकार ने उर्वरक संकट से बचने के लिए समय रहते ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार उर्वरक आयात को मजबूत बना रही है ताकि किसी एक क्षेत्र से सप्लाई रुकने पर तुरंत दूसरे देशों से खरीद बढ़ाई जा सके। ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच जारी तनाव ने वैश्विक स्थिति को और जटिल बना दिया है, लेकिन भारत ने पहले ही अपनी रणनीति सक्रिय कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा कि किसी भी वैश्विक संकट का असर भारत की खेती या खाद्य सुरक्षा पर नहीं पड़ने दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों और खासकर किसानों को भरोसा दिलाया कि देश के पास खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि खरीफ सीजन की बुवाई पर कोई प्रभाव न पड़े। सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में ही आपात स्थितियों से निपटने के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था की है। पीएम मोदी ने यह भी दोहराया कि सरकार किसानों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का आर्थिक बोझ नहीं झेलने देगी।
भारत पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखकर उर्वरक सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। ईरान के साथ जारी संवाद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तनाव के बावजूद उर्वरकों की आपूर्ति बाधित न हो। चूंकि भारत को डीएपी की सबसे ज्यादा सप्लाई सऊदी अरब से और यूरिया की प्रमुख सप्लाई ओमान से मिलती है, इसलिए इस क्षेत्र में युद्ध या कोई रुकावट भारत की सप्लाई को प्रभावित कर सकती है। हालांकि अभी देश के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन अगर तनाव लम्बा चला तो चुनौती बढ़ सकती है।
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भारत की तैयारी से किसानों को राहत
सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए भी तेजी से काम कर रही है। उर्वरक कंपनियों को उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए अपने प्लांट के मेंटेनेंस शटडाउन पहले पूरा करने का निर्देश मिल चुका है। सरकार नैनो-फर्टिलाइज़र और नई तकनीकों को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है। विदेश मंत्रालय ने मौजूदा हालात को देखते हुए पहले ही वैश्विक टेंडर जारी कर दिए थे, और उनमें अच्छा रिस्पॉन्स मिलने के बाद मार्च तक बड़ी मात्रा में उर्वरक भारत आने की उम्मीद है।
खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की मांग बढ़ जाती है और धान, मक्का, कपास जैसी फसलों के लिए खाद की जरूरत होती है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इस समय भारत के पास पिछले साल की तुलना में अधिक स्टॉक है—यूरिया में 10.7 प्रतिशत और डीएपी में 105 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत 425 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 600 डॉलर प्रति टन से ऊपर चली गई है, लेकिन सरकार सब्सिडी देकर किसानों पर बढ़ती कीमतों का बोझ नहीं पड़ने दे रही है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत की ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा को एक गंभीर मुद्दा बना दिया है। फिर भी देश अभी सुरक्षित स्थिति में है क्योंकि स्टॉक पर्याप्त है और वैकल्पिक सप्लाई चैन भी उपलब्ध हैं। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखकर हर स्तर पर सतर्कता बरत रही है। प्रधानमंत्री मोदी के आश्वासन के साथ सरकार की बहुस्तरीय रणनीति दिखाती है कि भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच अपनी कृषि और खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।


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