मुंबई के रियल एस्टेट बाजार में इन दिनों हल्की सुस्ती देखने को मिल रही है, खासकर लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट में। कई संभावित खरीदार फिलहाल बाजार से दूरी बनाए हुए हैं और हालात स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिसका असर मुंबई के प्रॉपर्टी बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। रियल एस्टेट से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले करीब दस दिनों में कई खरीदारों ने “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाई है और नई बुकिंग करने से पहले अंतरराष्ट्रीय हालातों पर नजर रख रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ संभावित ग्राहकों ने फिलहाल अपनी बुकिंग टाल दी है और जो सौदे पहले से चल रहे थे, उन्हें भी अंतिम रूप देने में समय लगा रहे हैं। हालांकि बाजार में गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हुई हैं, लेकिन पहले की तुलना में गति धीमी पड़ गई है। खासतौर पर 10 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले लग्जरी फ्लैट्स के सेगमेंट में यह असर ज्यादा स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, जहां बड़े निवेश से पहले खरीदार अधिक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में लग्जरी प्रॉपर्टी खरीदने वाले कई संभावित ग्राहक अभी अपना फैसला टाल रहे हैं। वे वैश्विक हालात और युद्ध की दिशा को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। रियल एस्टेट सलाहकारों का कहना है कि पहले जहां अधिकांश ग्राहक तुरंत बुकिंग करने के लिए तैयार रहते थे, वहीं अब उनमें से लगभग 40 से 50 प्रतिशत लोग इंतजार की स्थिति में हैं। वे यह देखना चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां आगे किस दिशा में जाती हैं।
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लग्जरी प्रॉपर्टी में फैसले हो रहे धीमे
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि 5 करोड़ से 10 करोड़ रुपये के बीच की प्रॉपर्टी खरीदने वाले ग्राहकों के फैसलों पर भी कई आर्थिक कारक असर डाल रहे हैं। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अंतरराष्ट्रीय तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा, कई खरीदार मौजूदा अनिश्चित परिस्थितियों के बीच अपनी नौकरी और आय की स्थिरता को लेकर भी सावधानी बरत रहे हैं।
मुंबई ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रियल एस्टेट बाजार में ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है। दुबई के प्रॉपर्टी बाजार में भी निवेशकों ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है और कई संभावित खरीदारों ने अपने निवेश के फैसले टाल दिए हैं। दुबई में संपत्ति खरीदने वाले विदेशी निवेशकों में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है, इसलिए वहां के बाजार में भी मौजूदा वैश्विक तनाव का असर महसूस किया जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सुस्ती लंबे समय तक नहीं रह सकती। उनका कहना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो दुबई में निवेश करने वाले कुछ निवेशक भारत के बाजार की ओर रुख कर सकते हैं। वहीं यदि अगले चार से आठ हफ्तों में वैश्विक हालात स्थिर हो जाते हैं, तो फिलहाल रुके हुए कई सौदे फिर से सक्रिय हो सकते हैं। तब तक रियल एस्टेट बाजार में निवेशकों के बीच सतर्कता और इंतजार का माहौल बना रह सकता है।
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