March 12, 2026

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Hormuz Strait

Hormuz Strait से तेल टैंकर लेकर मुंबई पहुंचे कैप्टन संधू

Hormuz Strait से गुजरते हुए मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और लगातार हो रहे हमलों के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई, जब भारी मात्रा में कच्चा तेल लेकर एक टैंकर सुरक्षित रूप से मुंबई के बंदरगाह तक पहुंच गया। इस जहाज ने दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक से गुजरते हुए लंबी और जोखिम भरी यात्रा पूरी की।

लाइबेरियन झंडे वाला सुएज़मैक्स टैंकर Shenlong सऊदी अरब से करीब 1.35 लाख टन कच्चा तेल लेकर मुंबई पहुंचा, और युद्ध शुरू होने के बाद इस मार्ग से भारत पहुंचने वाला यह पहला जहाज माना जा रहा है। जहाज की कमान भारतीय कैप्टन सुखशांत सिंह संधू के हाथों में थी, जिन्होंने पूरी टीम के साथ बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में यह यात्रा पूरी की। इस घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चर्चाओं को भी तेज कर दिया है।

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Hormuz Strait से गुजरना क्यों था बेहद जोखिम भरा

हाल के दिनों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण Hormuz Strait दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में बदल गया है। इस क्षेत्र में ड्रोन हमलों, मिसाइल हमलों और नौसैनिक गतिविधियों के कारण कई जहाजों ने इस रास्ते से गुजरने से बचने की कोशिश की। इन परिस्थितियों के बावजूद Shenlong ने सऊदी अरब के रास तनुरा पोर्ट से तेल लोड करने के बाद अपनी यात्रा जारी रखी। समुद्री ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, जहाज का अंतिम सिग्नल होर्मुज क्षेत्र के भीतर देखा गया, जिसके बाद उसका ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद हो गया। इस रणनीति को समुद्री भाषा में “Going Dark” कहा जाता है, जिसका उपयोग जहाज संभावित हमलों से बचने के लिए करते हैं। कुछ समय बाद जहाज फिर से ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उसने सबसे खतरनाक क्षेत्र को सुरक्षित रूप से पार कर लिया है।

कैप्टन और क्रू की रणनीति से पूरी हुई चुनौतीपूर्ण यात्रा

इस जहाज पर कुल 29 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के नाविक शामिल थे। कैप्टन सुखशांत सिंह संधू के नेतृत्व में पूरी टीम ने सतर्कता और रणनीतिक योजना के साथ इस जोखिम भरे मार्ग को पार किया। अंततः जहाज बुधवार को मुंबई पहुंचा और बाद में जवाहर दीप टर्मिनल पर सुरक्षित रूप से खड़ा किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के लिए यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के लगभग आधे से अधिक तेल और गैस आयात Hormuz Strait से होकर आते हैं। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक तेल कीमतों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

इसके अलावा, विश्लेषकों का मानना है कि भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संवाद ने भी इस मार्ग से भारतीय जहाजों के सुरक्षित गुजरने में भूमिका निभाई हो सकती है। इस प्रकार Shenlong की यह यात्रा केवल एक समुद्री अभियान नहीं बल्कि वैश्विक संकट के बीच साहस, रणनीति और समुद्री कौशल का उदाहरण बनकर सामने आई है।

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