सोना: वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच सोना और चांदी की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे निवेशकों का रुझान फिर सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, कॉमेक्स बाजार में सोना लगभग 1.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,773.21 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी भी करीब 1.97 प्रतिशत की तेजी के साथ 77.99 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी। इसी तरह, घरेलू बाजार में भी मजबूत रुझान देखने को मिला, जहां मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 1.25 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 1,53,570 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
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सोना की तेजी: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछाल
वहीं, चांदी ने भी तेज रफ्तार दिखाई और 2.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 2,50,502 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर ट्रेड करती नजर आई। ज्वैलरी बाजार में भी कीमतों में तेजी बनी रही, जहां सोना लगभग 1,54,750 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 2.65 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिकती दिखी। सोना की कीमतों में यह उछाल केवल अंतरराष्ट्रीय संकेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि घरेलू बाजार में भी इसका सीधा असर देखने को मिला। सुबह के कारोबार में सोने के जून कॉन्ट्रैक्ट ने 1,53,000 रुपये के ऊपर मजबूती बनाए रखी और दिन के दौरान उच्चतम स्तर भी छुआ। इसी तरह चांदी के मई कॉन्ट्रैक्ट में भी तेजी जारी रही और यह 2,49,000 रुपये के आसपास पहुंच गई।
देश के प्रमुख महानगरों में कीमतें लगभग समान बनी रहीं, हालांकि चेन्नई में 24 कैरेट सोने की कीमत सबसे ज्यादा करीब 1,55,460 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। वहीं दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों में सोना लगभग 1,54,700 रुपये के आसपास कारोबार करता रहा। इसके अलावा, 22 कैरेट सोने की कीमत भी प्रमुख शहरों में स्थिर रेंज में बनी रही, जबकि 18 कैरेट सोना अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध रहा, जिससे छोटे खरीदारों को कुछ राहत मिलती दिखी।
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बढ़ती अनिश्चितता से बढ़ी मांग
सोना और चांदी की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता को माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और सीजफायर की समयसीमा बढ़ने की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
इसी बीच, Donald Trump के बयान और मध्यस्थ देशों द्वारा शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिशों ने बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ाया है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकते हैं, जिससे सोना और चांदी की मांग बढ़ जाती है। इस स्थिति में विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिरता नहीं आती, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत होगी।
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