सोना: बीते एक साल में शानदार रिटर्न देने के बावजूद अब सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को भविष्य को लेकर असमंजस में डाल दिया है।
कमोडिटी मार्केट में 27 अप्रैल को हफ्ते की शुरुआत हल्की गिरावट के साथ हुई, जहां MCX पर सोने और चांदी दोनों के दाम नीचे खुले और दिन के दौरान भी दबाव में रहे। सोने का जून कॉन्ट्रैक्ट मामूली गिरावट के साथ खुला और सुबह के कारोबार में करीब 0.21 प्रतिशत गिरकर ट्रेड करता नजर आया, जबकि चांदी में भी आधे प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी देखी गई।
हालांकि, अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी अलग दिखाई देती है। वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक अस्थिरता के बीच सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। सोने ने एक साल में 40 प्रतिशत से अधिक और छह महीनों में करीब 18 प्रतिशत से ज्यादा का लाभ दिया, जबकि चांदी ने इसी अवधि में 128 प्रतिशत से अधिक और छह महीनों में 61 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया।
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इसके अलावा, इस साल फरवरी के अंत में दोनों धातुओं ने अपने ऑल टाइम हाई स्तर को छुआ था। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि हालिया भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मिडिल ईस्ट के संघर्ष के दौरान, पारंपरिक ट्रेंड के विपरीत कीमतों में लगातार तेजी देखने को नहीं मिली।
सोना की चाल पर एक्सपर्ट्स की नजर
सोना और चांदी की भविष्य की दिशा को लेकर विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में फिलहाल वॉलेटिलिटी बनी रह सकती है, खासकर जब वैश्विक स्तर पर कई अहम आर्थिक और राजनीतिक घटनाएं सामने हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस छोटे कारोबारी सप्ताह में कीमतों पर बिकवाली का दबाव रह सकता है।
इसके साथ ही, निवेशक अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए हुए हैं। इन सभी कारकों का सीधा असर सोना-चांदी के दामों पर पड़ सकता है, जिससे बाजार की दिशा तय होगी।
आर्थिक मोर्चे पर, बाजार सहभागियों की नजर प्रमुख केंद्रीय बैंकों जैसे Federal Reserve, Bank of Japan, Bank of England और European Central Bank के नीतिगत फैसलों पर रहेगी। इसके अलावा, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े जैसे PCE मुद्रास्फीति, उपभोक्ता विश्वास और हाउसिंग डेटा भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करेंगे।
अंततः, बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय अलग-अलग एसेट क्लास में संतुलित निवेश रणनीति अपनाएं, क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में जोखिम और अवसर दोनों साथ-साथ मौजूद हैं।
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