सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव
सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान, डॉलर की चाल और घरेलू मांग के आधार पर लगातार बदलती रहती हैं। यही वजह है कि खरीदारी से पहले ताजा कीमतों की जानकारी लेना जरूरी होता है। गुरुवार को सोने और चांदी की वायदा कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली।
एमसीएक्स पर सोने-चांदी के दाम गिरे
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 11:35 बजे 2 अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के अनुबंध में 0.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इसके बाद सोना 1,61,411 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं 5 मई डिलीवरी वाले चांदी के अनुबंध में 1.08 प्रतिशत की गिरावट आई और कीमत 2,62,703 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।
महानगरों में सोने के हाजिर भाव
देश के प्रमुख महानगरों में सोने की कीमतों में हल्का अंतर देखने को मिला। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट अलग-अलग रेट दर्ज किए गए। शहरों के अनुसार कीमतों में मामूली बदलाव नजर आया।
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सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, महानगरों में ताजा भाव जारी
दिल्ली और मुंबई में सोने का भाव
दिल्ली में 24 कैरेट सोना 16,368 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत 15,005 रुपये और 18 कैरेट सोना 12,280 रुपये प्रति ग्राम है। दूसरी ओर मुंबई में 24 कैरेट सोना 16,353 रुपये, 22 कैरेट 14,990 रुपये और 18 कैरेट सोना 12,265 रुपये प्रति ग्राम पर बिक रहा है।
कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु के रेट
कोलकाता में सोने के दाम लगभग मुंबई के समान हैं, जहां 24 कैरेट सोना 16,353 रुपये प्रति ग्राम है। चेन्नई में कीमत थोड़ी अधिक है और यहां 24 कैरेट सोना 16,495 रुपये प्रति ग्राम पर बिक रहा है। बेंगलुरु में 24 कैरेट सोना 16,353 रुपये, 22 कैरेट 14,990 रुपये और 18 कैरेट 12,265 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया।
ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमत बढ़ी
दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी देखने को मिली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। इसी वजह से सोना लगभग 5,170 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।
मध्य पूर्व तनाव का असर
क्षेत्र में जारी संघर्ष अब छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका और इज़राइल की सेनाओं ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए, जबकि तेहरान ने जवाबी कार्रवाई में पड़ोसी देशों पर मिसाइल दागे। इन हमलों के दौरान कई महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठान भी निशाने पर आए, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी।
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