अमेरिका–भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों में मजबूती
अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिदृश्य में, यह देश पहले सोच-समझकर संतुलित रणनीति अपनाता नज़र आ रहा है। एक ओर, अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर, भारत के साथ भी आर्थिक सहयोग को नई गति मिल रही है। इसके साथ ही, निवेश, सप्लाई चेन और तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी मज़बूत होने से दोनों लोकतांत्रिक देशों के साथ इसके संबंध और गहरे हुए हैं। नतीजतन, वैश्विक बाज़ार में इस देश की स्थिति लगातार सशक्त होती जा रही है, जिससे आगे चलकर आर्थिक विस्तार और स्थिरता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
चीन के प्रति सख़्त रुख, व्यापारिक तनाव में बढ़ोतरी
वहीं चीन के मामले में यह देश पहले की तुलना में कहीं अधिक कड़ा रुख अपना रहा है। व्यापारिक असंतुलन, रणनीतिक टकराव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार चीन के साथ रिश्तों की दोबारा समीक्षा कर रही है। कई क्षेत्रों में चीनी निवेश और आयात पर पुनर्विचार किया जा रहा है, साथ ही वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों को प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पर निर्भरता घटाने की इस नीति के तहत यह देश अमेरिका और भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ा रहा है, जिसका असर भविष्य में वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर साफ़ दिखाई देगा।


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