EV कंपनी 52 वीक लो पर पहुंच गई है। शेयर बाजार में मजबूती के बावजूद Ola Electric Mobility के शेयरों में कमजोरी साफ दिखी। सोमवार को स्टॉक में 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इससे बाजार में हलचल बढ़ गई। नतीजतन निवेशकों की चिंता गहराई। कई अल्पकालिक निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसके अलावा ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी दबाव देखा गया। यह बढ़ती बिकवाली और घटते भरोसे का संकेत है।
हालांकि व्यापक बाजार सकारात्मक रुख में था। प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। फिर भी इस EV कंपनी में गिरावट जारी रही। इसके साथ ही ब्रोकरेज हाउस द्वारा टारगेट प्राइस में बड़ी कटौती की गई। इससे निवेशकों का sentiment और प्रभावित हुआ। पहले विश्लेषकों का नजरिया आशावादी था। वे लंबी अवधि की संभावनाओं पर भरोसा जता रहे थे। लेकिन अब अनुमान घटा दिए गए हैं। इसलिए निवेशकों का विश्वास कमजोर पड़ा है। परिणामस्वरूप शेयर में अस्थिरता बढ़ी है। निकट अवधि में उतार-चढ़ाव तेज रह सकता है।
EV कंपनी 52 वीक लो: टारगेट में 60% कटौती
बीएसई में शेयर 30.01 रुपये पर खुला। शुरुआत में यह सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। हालांकि कुछ ही समय में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इसके कारण कीमतों में तेज गिरावट आई। बाद में भाव 28.73 रुपये तक फिसल गया। इस तरह EV कंपनी 52 वीक लो स्तर पर पहुंच गई। यह पिछले एक साल के प्रदर्शन की तुलना में काफी कमजोर स्थिति दिखाता है। तुलना करें तो इसका 52 वीक हाई 71.24 रुपये रहा है। इसलिए मौजूदा स्तर काफी नीचे माना जा रहा है।
इसी बीच Emkay Global Financial Services ने स्टॉक पर ‘Sell’ रेटिंग जारी की है। पहले 50 रुपये का लक्ष्य तय किया गया था। यह कंपनी की संभावित वृद्धि को दर्शाता था। अब इसे घटाकर 20 रुपये कर दिया गया है। यानी लगभग 60 प्रतिशत की कटौती की गई है। ब्रोकरेज के अनुसार रेवेन्यू में लगातार गिरावट है। साथ ही मार्जिन पर भी दबाव बना हुआ है। इसलिए भविष्य की आय प्रभावित हो सकती है। इसी कारण विश्लेषकों ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
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Ola Electric का घाटा बरकरार, रेवेन्यू और वॉल्यूम में गिरावट
वित्तीय नतीजों के अनुसार तीसरी तिमाही में कंपनी को 490 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। हालांकि यह पिछले वर्ष की समान तिमाही से कम है। फिर भी नुकसान पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इससे साफ है कि कंपनी अभी भी लाभप्रदता के लिए संघर्ष कर रही है। साथ ही बैलेंस शीट पर दबाव बना हुआ है। नकदी प्रवाह की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इसलिए आगे की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा सालाना आधार पर रेवेन्यू 55 प्रतिशत घटा है। यह मांग में कमजोरी का संकेत देता है। वहीं तिमाही आधार पर शेयर 32 प्रतिशत कमजोर हुआ है। इससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। इसी क्रम में वॉल्यूम में भी गिरावट दर्ज की गई है। यह बाजार में घटती भागीदारी को दर्शाता है। ऑटो बिजनेस का रेवेन्यू 467 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले स्तरों की तुलना में कम है। हालांकि सेल्स सेगमेंट में मामूली सुधार दिखा है। लेकिन घटता मार्केट शेयर और बढ़ती प्रतिस्पर्धा कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
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