October 30, 2026

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दिल्ली में विपक्षी रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता, सोनिया गांधी से तारीख बदलने की अपील

दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित विपक्षी दलों की रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने का आग्रह किया है। संगठन ने इससे पहले राहुल गांधी को भी पत्र भेजा था। CTI के मुताबिक, 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को रैली के कारण राजधानी के कई प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इससे व्यापारिक गतिविधियां ठप पड़ने की आशंका है। संगठन ने बताया कि दिल्ली में लगभग 20 लाख व्यापारी कारोबार करते हैं। त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में ग्राहकों और माल की आवाजाही बेहद जरूरी रहती है। ऐसे में व्यापारियों को रैली के कारण होने वाली संभावित परेशानियों की चिंता सता रही है।

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दिल्ली: त्योहारी कारोबार बचाने के लिए CTI की दो मांगें

CTI ने सोनिया गांधी के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग के तहत संगठन ने रैली को दिवाली के बाद 10 या 11 नवंबर के बाद आयोजित करने का सुझाव दिया है। दूसरी मांग में उसने रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी मैदान में रैली कराने की अपील की है। संगठन के अनुसार, बुराड़ी मैदान में लगभग 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था उपलब्ध है। CTI ने अपने पत्र में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। संगठन के मुताबिक, उस दिन केवल 5,000 से 7,000 लोग पहुंचे थे, फिर भी मध्य दिल्ली में करीब आठ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। CTI ने आशंका जताई कि प्रस्तावित रैली में लगभग 10 लाख लोगों के पहुंचने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

CTI ने अपने पत्र में दिल्ली के प्रमुख बाजारों को शहर की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बताया है। संगठन के अनुसार, इन 20 बाजारों में रोजाना लगभग 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर को है और इसके बाद दिवाली का त्योहार आएगा। व्यापारी इस समय बड़ी मात्रा में सामान मंगाते और ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। यदि 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को मध्य दिल्ली में यातायात बाधित होता है, तो माल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, दिल्ली के आसपास के शहरों और कस्बों से रोजाना 3 से 4 लाख लोग खरीदारी के लिए राजधानी पहुंचते हैं। CTI को आशंका है कि यातायात की परेशानी के कारण ग्राहक बाजारों तक आने से बच सकते हैं।

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अखिलेश यादव और ममता बनर्जी से भी मांगा समर्थन

दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने सोनिया और राहुल गांधी के अलावा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी पत्र लिखा है। सदर बाजार ट्रेड एसोसिएशन फेडरेशन और किराना कमेटी दिल्ली ने दोनों नेताओं से कांग्रेस नेतृत्व के सामने व्यापारियों की मांग उठाने का आग्रह किया है। संगठनों ने बताया कि धनतेरस से दिवाली के बीच दिल्ली में लगभग 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। उनके अनुसार, सितंबर और अक्टूबर में प्रदर्शनों, रैलियों तथा यातायात प्रतिबंधों के कारण व्यापारियों को पहले ही लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसलिए वे त्योहारी सीजन में एक और बड़ी सभा से बचने की मांग कर रहे हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि रैली के आयोजन को लेकर समय और स्थान पर दोबारा विचार करने से बाजारों की गतिविधियां सामान्य बनी रह सकती हैं।

व्यापारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि खरीदारी के व्यस्त मौसम में एक और बड़ी रैली से 10,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसका असर केवल दुकानदारों और व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा। बाजारों में काम करने वाले श्रमिकों, डिलीवरी कर्मियों और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है। संगठनों के मुताबिक, रामलीला मैदान के लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में सदर बाजार, खारी बावली और चांदनी चौक सहित करीब 20 प्रमुख थोक एवं खुदरा बाजार स्थित हैं। इन बाजारों में रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक, कारोबारी और मालवाहक वाहन पहुंचते हैं। ऐसे में रैली के दौरान यातायात प्रतिबंधों का असर व्यापक हो सकता है। फिलहाल CTI ने कांग्रेस नेतृत्व से रैली की तारीख या स्थान बदलने पर विचार करने की अपील की है।

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