पार्टी ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत से पीछे रह गई। सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और कांग्रेस का पुराना गठबंधन इस चुनाव के बाद टूट गया। चुनाव नतीजों के बाद राज्य में सरकार गठन को लेकर तेज राजनीतिक बहस शुरू हो गई हैं। कांग्रेस ने पांच सीटें जीतने के बावजूद टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया। कांग्रेस के कई नेताओं ने चुनाव से पहले भी टीवीके के साथ गठबंधन की वकालत की थी। अब पार्टी ने खुलकर कहा है कि वह विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देगी। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में Vijay की तमिलगा वेत्री कड़गम ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया।
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टीवीके को न्योता न मिलने पर संवैधानिक बहस तेज
कांग्रेस के समर्थन के बाद भी टीवीके बहुमत के आंकड़े से दूर रही। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और सीपीआई ने भी टीवीके को समर्थन देने के संकेत दिए हैं। इसके बाद विजय ने अन्य दलों से भी बातचीत शुरू की। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी रचनात्मक समर्थन की बात कही है। इन दलों का साथ मिलने पर टीवीके खेमे की संख्या 119 तक पहुंच सकती है। इस बीच विजय ने बुधवार को तमिलनाडु के कार्यवाहक राज्यपाल Rajendra Arlekar से मुलाकात की। उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया और समर्थन का आंकड़ा भी रखा। हालांकि राज्यपाल ने अब तक टीवीके को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया है। इसी मुद्दे ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
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राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि राज्यपाल किस आधार पर फैसला लेंगे। कुछ लोग मान रहे हैं कि सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण टीवीके को पहले मौका मिलना चाहिए। वहीं कुछ विश्लेषक डीएमके, एआईएडीएमके के बीच संभावित समीकरणों की भी चर्चा कर रहे हैं। हालांकि दोनों दलों ने अभी तक किसी नए गठबंधन का संकेत नहीं दिया है। बीबीसी तमिल की रिपोर्ट के मुताबिक एआईएडीएमके ने अपने कई विधायकों को पुडुचेरी के एक निजी होटल में ठहराया है। पार्टी के भीतर टीवीके को समर्थन देने को लेकर अलग-अलग राय सामने आई हैं। इस मुद्दे पर पार्टी महासचिव Edappadi K. Palaniswami की अध्यक्षता में बैठक भी हुई। हालांकि पूर्व मंत्री केपी मुनुस्वामी ने साफ कहा कि एआईएडीएमके किसी भी स्थिति में टीवीके का समर्थन नहीं करेगी।
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