सैयारा और धुरंधर जैसी बड़ी फिल्मों की आंधी के बीच एक गुजराती फिल्म कब ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर बन गई, इसकी भनक तक दर्शकों को नहीं लगी। रीजनल कलाकारों के साथ बनी यह डिवोशनल फिल्म गुजराती बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर चुकी है और अब पब्लिक डिमांड के चलते हिंदी में रिलीज होने जा रही है।
दरअसल, इस फिल्म का नाम ‘लालो: कृष्ण सदा सहायते’ है। यह मूवी 10 अक्टूबर 2025 को गुजराती भाषा में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। हैरानी की बात यह है कि रिलीज के करीब 90 दिन बाद भी इसके टिकट्स लगातार बिक रहे हैं। खास बात यह है कि महज 50 लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया है। वहीं, IMDb पर इसे 8.6 की शानदार रेटिंग मिली है। अब यह फिल्म 9 जनवरी को हिंदी में दर्शकों के सामने आएगी।
आस्था और संघर्ष से भरी लालो की कहानी
फिल्म ‘लालो: कृष्ण सदा सहायते’ एक गहरी आस्था और भावनाओं से भरी कहानी को दर्शाती है। यह एक साधारण रिक्शा चालक लालो की कहानी है, जो टूरिस्ट्स को घुमाने के दौरान एक फार्महाउस में फंस जाता है। वहां से बाहर निकलने की तमाम कोशिशों के बावजूद हालात और बिगड़ते चले जाते हैं। खाने-पीने की कमी और अकेलेपन के बीच उसका संघर्ष बढ़ता जाता है।
इसी दौरान घर पर उसके परिवारवाले परेशान होकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन लालो का कोई सुराग नहीं मिलता। मजबूर होकर लालो भगवान से प्रार्थना करता है और तभी उसे श्रीकृष्ण का मार्गदर्शन और दर्शन मिलते हैं, जिसके बाद उसकी पूरी जिंदगी एक नया मोड़ ले लेती है।
कांटारा से तुलना, लेकिन कहानी अलग
हालांकि फिल्म की तुलना कांतारा से की जा रही है, क्योंकि इसमें भी दिव्य शक्ति और आस्था का प्रभाव दिखता है। वहीं, 12वीं फेल की तरह यह भी एक आम आदमी के संघर्ष को सामने लाती है। लेकिन फर्क यह है कि ‘लालो’ की कहानी बेहद सौम्य, सरल और शांत तरीके से आगे बढ़ती है।
अगर आप परिवार के साथ कोई क्लीन और भावनात्मक मनोरंजन देने वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।
इसके अलावा, फिल्म का लो-बजट होना इसके रास्ते में कभी बाधा नहीं बना। भले ही विजुअल्स में ज्यादा तामझाम नहीं है, लेकिन इसका बैकग्राउंड स्कोर फिल्म में जान डाल देता है। खास बात यह भी है कि मूवी की शूटिंग बेहद चुपचाप लोकल लोकेशंस पर की गई थी।
फिल्म के अभिनेता करण जोशी के मुताबिक, शूटिंग के दौरान स्थानीय लोगों को यह तक नहीं बताया गया था कि फिल्म की शूटिंग हो रही है। जूनागढ़ में लोगों से कहा गया था कि यह एक प्री-वेडिंग शूट है। मेकर्स नहीं चाहते थे कि फिल्म से किसी तरह की नेगेटिव एनर्जी जुड़े। इसलिए छोटे कैमरे के साथ शांत माहौल में पूरी शूटिंग की गई।
कम शब्दों में कहें तो, सादगी, आस्था और मजबूत कहानी के दम पर ‘लालो: कृष्ण सदा सहायते’ ने साबित कर दिया कि बड़ी सफलता के लिए बड़ा बजट जरूरी नहीं होता।


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