सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष से पृथ्वी देखना बेहद अद्भुत अनुभव बताया। उन्होंने कहा, वहां बहस करना अजीब लगता है। उन्होंने नासा में 27 साल काम किया और हाल ही में रिटायर हुईं। उनकी अंतरिक्ष यात्रा ने दृष्टिकोण बदला। दिल्ली और केरल में छात्रों, वैज्ञानिकों और पाठकों से मिलीं। उन्होंने अपने करियर और अंतरिक्ष अनुभव साझा किए।
विलियम्स ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 600 से अधिक दिन बिताए। उन्होंने सबसे ज्यादा स्पेसवॉक का रिकॉर्ड बनाया। बीस चौकसी और रोबोटिक प्रशिक्षण उनके रोज़मर्रा के काम का हिस्सा थे। हर दिन नए अनुभव और चुनौतियां लाता। वह 2024 में कुछ ही दिन अंतरिक्ष में रहने वाली थीं, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण नौ महीने बिताए।
अंतरिक्ष में रहते हुए उन्हें परिवार की याद आई। उन्होंने भावनात्मक कठिनाइयों को स्वीकार किया और परिवार का समर्थन पाया। भारत की उनकी यात्राएं पिछली यात्रा से अलग अनुभव देती हैं। उन्होंने बदलाव, नई तकनीक और इन्नोवेशन देखा। वह भारत में विज्ञान और तकनीक में बढ़ती महत्वाकांक्षा से प्रभावित हुईं।
Also Read: एक दिन में कितने बेर खा सकते हैं, जान लें रोजाना बेर खाने से शरीर को क्या फायदे मिलते हैं
अंतरिक्ष से नई दृष्टि, परिवार और भारत से गहरा जुड़ाव, नासा करियर और रिटायरमेंट के बाद नई चुनौतियां
गुजरात के उनके पैतृक गांव झुलासन से उनका गहरा जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि परिवार और गांव के लोग हमेशा उनका समर्थन करते। वह जल्द ही बहन और परिवार के साथ वहां लौटने की योजना बना रही हैं। केरल यात्रा ने भी उन्हें नया अनुभव दिया। अंतरिक्ष से देखा गया दृश्य उन्हें मानवता और पृथ्वी के महत्व का एहसास दिलाता है।
विलियम्स ने कहा कि बहस और झगड़ा अंतरिक्ष से अजीब लगता है। सहानुभूति और धैर्य बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने एआई की शक्तियों और सीमाओं पर चर्चा की। इसका इस्तेमाल इंसानों को सहयोग देने के लिए होना चाहिए। अब उनका ध्यान यात्रा, परिवार और पहाड़ों पर चढ़ाई जैसी नई चुनौतियों में है।
Also Read: UGC के 4 नियमों को लेकर टीचर्स और स्टूडेंट्स में क्यों है बवाल?


More Stories
CRPF Launches Inquiry as Eight Assistant Commandants Skip Special DG’s Official Lunch
ब्रिटेन से भारत लौटेगी वाग्देवी की दुर्लभ प्रतिमा, सरकार ने तेज किए कूटनीतिक प्रयास
Bihar model schools get new look as principals follow renaming and repainting orders