March 6, 2026

Central Times

Most Trusted News on the go

संविधान

संविधान में महिलाओं का ऐतिहासिक योगदान

भारत का संविधान केवल कानूनों का संकलन नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र, समानता और न्याय की आधारशिला है। आज जिन स्वतंत्रताओं, अधिकारों और समान अवसरों पर हमें गर्व है, उनकी नींव 1946 में गठित संविधान सभा ने रखी थी। आज़ादी से पहले बनी इस सभा में देशभर से प्रतिनिधि चुने गए थे। विभाजन के बाद इसके 299 सदस्य रह गए, जिनमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं।उस दौर में महिलाओं का सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होना बेहद चुनौतीपूर्ण था। सामाजिक बंधनों के बावजूद महिलाओं ने साहस दिखाया, शिक्षा, समानता, अधिकार, स्वास्थ्य, श्रमिक हित और सामाजिक न्याय पर प्रभावी भूमिका निभाई।

Also Read:महाराष्ट्र के युवाओं को बड़ी राहत, 70 हजार सरकारी पदों पर होगी भर्ती

भारत के संविधान में इन महिलाओं की अहम भूमिका

प्रमुख महिला सदस्यों में अम्मू स्वामीनाथन, सरोजिनी नायडू, बेगम ऐजाज रसूल, हंसा मेहता, सुचेता कृपलानी, दुर्गाबाई देशमुख सहित अन्य शामिल थीं।किसी ने समान भागीदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य सुधार पर जोर दिया; बेगम ऐजाज रसूल ने धर्मनिरपेक्षता, दक्षायनी वेलायुधन ने छुआछूत विरोध उठाया। राजकुमारी अमृत कौर ने स्वतंत्र भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव रखने में योगदान दिया, वहीं हंसा मेहता ने महिलाओं को समान अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इन 15 महिलाओं का योगदान भारतीय संविधान के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है और देश हमेशा उनके साहस व दूरदर्शिता को याद रखेगा।

Also Read:ग्लोबल सेल-ऑफ अलर्ट: आईटी स्टॉक्स फिसले, मार्केट डाउन