आज 27 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी और बुधवार का संयोग बना है। यह विशेष एकादशी तीन वर्ष बाद आती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व काफी अधिक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने पर सभी 26 एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर सुख, समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। पद्मिनी एकादशी के अवसर पर श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार चार प्रहरों में अलग-अलग फल अर्पित करने का विधान बताया गया है। पहले प्रहर में नारियल, दूसरे में बेल फल, तीसरे में सीताफल और चौथे प्रहर में सुपारी तथा नारंगी अर्पित की जाती है। धार्मिक ग्रंथों में इसे विभिन्न यज्ञों के समान पुण्य देने वाला माना गया है।
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पद्मिनी एकादशी पर शुभ मुहूर्तों का विशेष महत्व
आज हस्त नक्षत्र के साथ व्यतीपात, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। सूर्योदय सुबह 5:36 बजे और सूर्यास्त शाम 7:07 बजे होगा। राहुकाल दोपहर 12:18 बजे से 2:02 बजे तक रहेगा, जबकि अभिजीत और अन्य शुभ मुहूर्तों में मांगलिक कार्यों को प्राथमिकता दी जा सकती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ योगों का प्रभाव कई कार्यों में सफलता और सकारात्मक परिणाम दे सकता है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति भी आज विशेष मानी जा रही है। सूर्य मेष राशि में, चंद्रमा कन्या राशि में और गुरु तथा शुक्र मिथुन राशि में विराजमान हैं। वहीं मंगल और शनि मीन राशि में स्थित हैं। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि इन ग्रह स्थितियों का प्रभाव विभिन्न राशियों के जातकों के जीवन, कार्यक्षेत्र और पारिवारिक मामलों पर अलग-अलग रूप में दिखाई देगा।
राशिफल के अनुसार मेष, कन्या, वृश्चिक और कुंभ राशि के लोगों को आज कार्यक्षेत्र और आर्थिक मामलों में लाभ मिलने के संकेत हैं। कर्क राशि के जातक नए कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं, जबकि वृषभ राशि के लोगों को परिवार से शुभ समाचार मिल सकता है। दूसरी ओर मिथुन, धनु और सिंह राशि के लोगों को विवादों से बचने तथा धैर्य बनाए रखने की सलाह दी गई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार आज भगवान विष्णु के समक्ष पीले चावलों की छोटी ढेरी बनाकर उस पर सुपारी स्थापित करनी चाहिए। विधिवत पूजा के बाद विष्णु चालीसा का पाठ करना शुभ माना गया है। अगले दिन उस सुपारी को तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने की परंपरा बताई गई है। मान्यता है कि इससे आर्थिक उन्नति के अवसर बढ़ते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।


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