नागपुर के कामठी रोड स्थित उपलवाड़ी पावर हाउस के पास एक पेपर लैमिनेशन फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। फैक्ट्री में रखे करीब 20 एलपीजी सिलेंडरों में धमाके हुए, जिससे पूरा इलाका दहल उठा। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की सात गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। आग इतनी तेज थी कि आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी चिंगारी कितना बड़ा हादसा बन सकती है?
दमकल की सात गाड़ियों ने पाया काबू
दमकल कर्मियों ने लगातार कई घंटों तक पानी की बौछार कर आग पर काबू पाया। हालांकि, देर रात करीब 10 बजे आग दोबारा भड़क उठी, जिससे हालात फिर तनावपूर्ण हो गए। फैक्ट्री में रखे पेपर रोल, केमिकल और अन्य ज्वलनशील सामग्री ने आग को और भयानक बना दिया। अधिकारियों ने बताया कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो नुकसान और बढ़ सकता था। सौभाग्य से इस हादसे में किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली।
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प्रारंभिक जानकारी के अनुसार फैक्ट्री में 25 से अधिक एलपीजी सिलेंडर रखे थे, जिनमें से कई फट गए। विस्फोट के बाद मलबे में कुछ सिलेंडर दब गए। प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र को खाली कराया और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में सिलेंडर रखने की अनुमति कैसे मिली? यह सवाल अब चर्चा में है।
सिलेंडरों के फटने से बढ़ा खतरा
दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने में कई घंटे लग गए। टीमों ने आसपास की इमारतों को सुरक्षित रखने के लिए कूलिंग ऑपरेशन भी चलाया। पुलिस ने एहतियात के तौर पर इलाके की घेराबंदी कर दी और लोगों को पास आने से रोका। प्रशासन ने फैक्ट्री प्रबंधन से सुरक्षा मानकों और सिलेंडरों के भंडारण से जुड़े दस्तावेज भी मांगे हैं। क्या सुरक्षा नियमों का सही पालन हुआ था? इसकी जांच अब तेज कर दी गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाकों की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। कुछ घरों की खिड़कियां भी कंपन से हिल गईं। घटना के बाद बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद की गई, ताकि कोई और हादसा न हो। अब अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं और रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं।
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