इज़रायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने बुधवार को ईरान के नए नेतृत्व को लेकर बेहद कड़ा और स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि ईरान में कोई नया सुप्रीम लीडर नियुक्त होता है और वह इज़रायल के खिलाफ सैन्य, परमाणु या रणनीतिक योजनाओं को आगे बढ़ाता है, तो उसे भी सीधे तौर पर निशाना बनाया जाएगा। उनके अनुसार, इज़रायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। इसलिए संभावित खतरे को पहले ही खत्म करना उसकी प्राथमिक नीति है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इज़रायल हर स्तर पर सतर्क है और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम है।
उन्होंने आगे कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि नए नेता का नाम क्या होगा या वह कहां शरण लेगा। इज़रायल उसे खोज निकालने और कार्रवाई करने की क्षमता रखता है। दरअसल, दिवंगत Ali Khamenei के बाद ईरान में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इसी क्रम में उनके बेटे Mojtaba Khamenei के नए सुप्रीम लीडर बनने की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि अभी तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, इन चर्चाओं ने क्षेत्रीय राजनीति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है और दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
नए शासन को कमजोर करने की रणनीति
इसके अलावा, काट्ज ने कहा कि इज़रायल अपने अमेरिकी सहयोगियों के साथ मिलकर व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल जवाबी सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है। बल्कि, ईरानी शासन की सैन्य और प्रशासनिक क्षमताओं को कमजोर करना भी प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने दावा किया कि निरंतर दबाव बनाकर ऐसी परिस्थितियां तैयार की जाएंगी, जिनसे मौजूदा सत्ता ढांचा प्रभावित हो सके। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि कूटनीतिक और सुरक्षा स्तर पर भी समन्वय बढ़ाया जा रहा है।
वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने नए नेतृत्व को लेकर चर्चा पूरी कर ली है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। इसके बावजूद, इन खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। इसलिए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में हालात और तनावपूर्ण हो सकते हैं। कुल मिलाकर, क्षेत्र में अनिश्चितता और रणनीतिक सतर्कता दोनों साथ-साथ बढ़ रही हैं।
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जंग का विस्तार और बढ़ता तनाव
इस बीच, इज़रायल और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। बुधवार सुबह Tehran में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने राजधानी और उसके आसपास विस्फोट होने की पुष्टि की। दूसरी ओर, इज़रायल ने कहा कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों के जवाब में उसकी हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय की गई। अधिकारियों का दावा है कि अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया गया, जिससे बड़े नुकसान को रोका जा सका।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया कि यह जंग कई हफ्तों या उससे भी अधिक समय तक जारी रह सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, अब तक ईरान में करीब 800 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इज़रायल में 11 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। एक दिन पहले इज़रायल ने ईरान के मिसाइल ठिकानों और एक परमाणु अनुसंधान केंद्र पर हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और क्षेत्र में सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी गई। परिणामस्वरूप, पूरे मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम स्तर पर बना हुआ है।
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