लखनऊ के काकोरी क्षेत्र के टिकैतगंज में गुरुवार शाम लगभग सात बजे हुए सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने साफ बताया कि हादसे की वजह रोडवेज बस की तेज रफ्तार, सड़क पर फैला गहरा अंधेरा और सड़क किनारे खड़ा ट्रैक्टर-टैंकर रहा। उनकी मानें तो अगर उस समय पर्याप्त रोशनी होती और टैंकर पर रिफ्लेक्टर लगे होते तो चालक समय रहते खतरे को देख सकता था और हादसा रोका जा सकता था। इस भयावह घटना में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा और भय दोनों दिखाई दिए और उन्होंने तुरंत राहत कार्य में हाथ बंटाया।
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लखनऊ : तीन वजहों ने ली पांच की जान
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के समय रोडवेज बस 80 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भाग रही थी, जिससे चालक का वाहन पर नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो गया। अचानक सामने अंधेरे में खड़ा ट्रैक्टर-टैंकर दिखाई ही नहीं दिया और बस सीधे उससे टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस सड़क पर मौजूद मजदूरों और दो बाइक सवारों को भी रौंदते हुए पलटी मारती हुई खाई में जा गिरी। वहां मौजूद लोग चीखते-चिल्लाते रह गए लेकिन कोई भी समय रहते खुद को बचा नहीं सका। इस दौरान पूरा इलाका अफरा-तफरी में डूब गया और लोग मदद के लिए दौड़ पड़े।
गांव के रहने वाले बबलू रावत और नरेश रावत ने घटनास्थल का पूरा हाल सुनाते हुए कहा कि हादसे से पहले टैंकर सड़क किनारे पौधों में पानी डाल रहा था और कुछ मजदूर भी काम कर रहे थे। जैसे ही बस वहां पहुंची, उसने सबको अपनी चपेट में ले लिया और पलटते हुए आठ बार लुढ़ककर खाई में जा गिरी। हादसे के बाद बस चालक और परिचालक को भी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनके बयानों में विरोधाभास सामने आया है, जिससे असली वजह को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल जाकर दोनों की स्थिति जानी और कहा कि विस्तृत जांच के बाद ही सही वजह सामने आ सकेगी। फिलहाल यह स्पष्ट है कि लापरवाही और सतर्कता की कमी ने इस त्रासदी को जन्म दिया।
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लखनऊ :धमाके जैसी आवाज और लखनऊ के गांव वालों की प्रतिक्रिया
टिकैतगंज गांव के निवासी राजकुमार रावत, बैजनाथ रावत, कोटेदार चंद्रप्रकाश रावत और प्रधान पति महेंद्र रावत ने बताया कि हादसे के समय वे लोग गांव में मौजूद थे और अचानक जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। उन्हें लगा जैसे कोई बड़ा विस्फोट हुआ हो और बिना देर किए सभी लोग भागते हुए हाईवे पर पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि टैंकर बीच सड़क पर पलटा पड़ा था और खाई में रोडवेज बस उलटी पड़ी थी। चारों ओर चीख-पुकार मची थी, लोग घायल अवस्था में पड़े थे और माहौल बेहद भयावह हो गया था। ग्रामीण तुरंत राहत कार्य में जुट गए और घायलों को बाहर निकालने की कोशिश करने लगे, लेकिन दृश्य इतना दर्दनाक था कि लोग सन्न रह गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सड़क किनारे रेलिंग लगी होती और ट्रैक्टर-टैंकर पर रिफ्लेक्टर मौजूद होता तो इतना बड़ा हादसा टल सकता था। रेलिंग बस को रोक सकती थी और रिफ्लेक्टर की चमक से चालक को दूर से ही टैंकर दिखाई दे जाता। इन सावधानियों की कमी ने कई निर्दोष लोगों की जान ले ली। परिवहन विभाग ने घोषणा की है कि हादसे में घायल लोगों को मुआवजा दिया जाएगा—साधारण घायलों को 10 हजार रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस हादसे ने प्रशासन और नागरिकों के सामने सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की बड़ी खामियों को उजागर कर दिया है। अब लोगों की मांग है कि भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।
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