कोलकाता के आनंदपुर इलाके में आग लगी, जिससे कई लोग अपने प्रियजन हमेशा के लिए खो बैठे। परिजन कहते हैं कि अब उन्हें पूरी तरह यकीन है कि वे अब नहीं रहे। चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन मृतकों की वास्तविक संख्या अभी तक साफ़ नहीं हुई। पुलिस डीएनए जांच कर रही है, ताकि आग में मारे गए सभी लोगों की पहचान हो सके। परिवारों का दर्द और बढ़ गया क्योंकि अधिकारियों ने अभी तक स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की।
26 जनवरी की सुबह गोदाम में अचानक आग लगी, और आग तेजी से पड़ोसी गोदाम तक फैल गई। पंकज ने अपनी पत्नी को फ़ोन किया और आग लगने की जानकारी दी, चिंतित स्वर में। उन्होंने कहा, “बस पाँच मिनट और बचे हैं, इसके बाद तुम मुझे कभी नहीं देख पाओगी।” मौसमी तुरंत घटनास्थल पर दौड़ीं, लेकिन इमारत पूरी तरह से आग की लपटों में घिरी हुई थी। उन्होंने देखा कि आग इतनी तेज़ थी कि कोई भी अंदर से सुरक्षित बाहर नहीं निकल पाया।
Also Read: सोना-चांदी के दाम लुढ़के, चांदी ₹24,000 तक गिरी, सोना ₹8,000 सस्ता
कोलकाता आग हादसा: परिजन अपने प्रियजन की मौत की पुष्टि के इंतजार में, सुरक्षा की बड़ी लापरवाही सामने
गोदाम में फर्नीचर, सजावटी सामान और अन्य ज्वलनशील सामग्री होने से आग बहुत तेजी से फैल गई। कई कर्मचारी सो रहे थे, और बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता पड़ोसी गोदाम ने बंद कर दिया। परिवार अब लगातार डीएनए जांच का इंतजार कर रहे हैं ताकि मृतकों की पहचान सुनिश्चित हो सके। पुलिस ने गोदाम मालिक को लापरवाही से मौत के आरोप में गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू की। अधिकारियों ने बताया कि गोदाम में वैध फ़ायर सेफ़्टी क्लियरेंस और बुनियादी अग्निशमन इंतज़ाम मौजूद नहीं थे।
वाओ! मोमो कंपनी ने मृतक कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक सहायता और जीवन भर मदद देने का ऐलान किया। परिवारों का कहना है कि यह घोषणाएं उनके दर्द को कम नहीं कर पा रही हैं। कुछ परिवार अब भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि रात में कितने लोग वास्तव में मौजूद थे। वे खुद बचे हुए लोगों और अन्य कर्मचारियों से बात कर तथ्य इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं। परिजन और अधिकारी अभी भी आग की सुरक्षा नियमों और नियामक उल्लंघन की जांच में व्यस्त हैं।
मौसमी और उनकी तीन साल की बेटी अब भी पंकज के लौटने की उम्मीद रखती हैं। बेटी अब भी पिता के आने और उनके साथ खेलने का बेसब्री से इंतजार कर रही है। परिजन चाहते हैं कि जल्द से जल्द सभी शवों की पहचान हो और अंतिम संस्कार किया जाए। अधिकारियों ने सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। परिवार अब सिर्फ़ सच्चाई और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि उनका दर्द कम हो सके।
Also Read: डॉ. विकास दिव्यकीर्ति: अंबेडकर न होते तो सवर्ण महिलाओं की स्थिति भी सीमित होती


More Stories
L’Oréal Reacts to Aishwarya Rai Bachchan’s Missing Presence in Cannes Ad
N. Rangasamy ने पांचवीं बार ली पुडुचेरी मुख्यमंत्री पद की शपथ, फिर संभाली सत्ता की कमान
Fuel Curbs Drive: Delhi CM Limits Official Vehicle Use After PM Modi’s Appeal