जयपुर के एसएमएस ट्रॉमा सेंटर में बीती रात भीषण आग लग गई, जिसमें आठ मरीजों की मौत हो गई। आग लगने के समय सेंटर में 250 से अधिक मरीज भर्ती थे। सेंटर में चार आईसीयू हैं, जिनमें 46 मरीज गंभीर हालत में थे। प्रशासन के अनुसार कुल 284 बैड सेंटर में मौजूद हैं। आग से धुआं फैल गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। सिविल डिफेंस और परिजन मरीजों को बाहर निकालने में जुट गए। अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर और वार्ड में भी हड़कंप मचा। कई मरीजों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी से बाहर निकलने में मदद की। यह हादसा अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
ट्रॉमा सेंटर: नेहा का दर्दनाक अनुभव
बसबदनपुरा की नेहा सड़क दुर्घटना के कारण अस्पताल में भर्ती थी। आग लगने के वक्त उसकी आंख लग गई थी, लेकिन परिवार वालों ने उसे गोद में उठा कर सुरक्षित बाहर निकाला। नेहा की जान परिवार के कारण बच गई। नेहा बताती है कि अस्पताल में जोर-जोर से चिल्लाने की आवाजें सुनाई दीं। वह गंभीर स्थिति में थी, इसलिए जल्दी बाहर निकालना मुश्किल था। अस्पताल का माहौल अचानक डरावना हो गया था। मरीजों की चीख-पुकार सुनकर लोग मदद को दौड़े। यह हादसा मरीजों के लिए बहुत बड़ा सदमा साबित हुआ।
ट्रॉमा सेंटर सीकर निवासी पिंटू इस आग हादसे में घायल होकर दम तोड़ गया। पिंटू के मामा के बेटे ओमप्रकाश ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले धुआं देखा था, लेकिन स्टाफ ने देर तक ध्यान नहीं दिया। आग तेजी से फैल गई और स्टाफ भी भाग गया। भरतपुर निवासी रुक्मणि देवी की भी मौत हो गई। उनके बेटे जोगेंद्र ने बताया कि आग के दौरान वार्ड में 13-14 लोग थे। धुआं और अंधकार में लोग एक-दूसरे को देख नहीं पाए। मोबाइल टॉर्च से कुछ मरीजों को निकाला गया, लेकिन कई अंदर रह गए।
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दिलीप कंवर की आपबीती
जयपुर निवासी दिलीप कंवर भी इस हादसे में मारे गए। दिलीप 23 सितंबर को गिरने से घायल हुए थे और अस्पताल में भर्ती थे। वह दिव्यांग थे और सही ढंग से चल नहीं पाते थे। रात को आग लगने पर उनके पिता किशन कंवर ने उन्हें बचाने की कोशिश की। अंधेरे में दिलीप नजर नहीं आ रहे थे, जिससे किशन खुद घायल हो गए। अस्पताल के अन्य मरीजों ने किशन कंवर को बाहर निकाला। दिलीप के परिवार पर इस हादसे का गहरा सदमा पड़ा है।
धुआं देखने के बाद भी अस्पताल स्टाफ ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। लगभग 20 मिनट बाद आग ने विकराल रूप ले लिया। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया में कई कमियां सामने आईं। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया। परिजनों और सिविल डिफेंस टीम ने मिलकर मरीजों को बाहर निकाला। अस्पताल प्रबंधन को इस घटना से सख्त सीख लेनी होगी। आग लगने की असली वजह की जांच भी जारी है।
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